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उत्तर बिहार में 9 से 11 अगस्त के बीच बारिश के आसार

-उत्तर बिहार में 9 से 11 अगस्त के बीच बारिश के आसार

-किसानों को जारी की गई कृषि सलाह

समस्तीपुर । पूसा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (पूसा) के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा केंद्र ने 9 से 13 अगस्त 2026 तक के लिए मौसम पूर्वानुमान और किसानों के लिए कृषि परामर्श जारी किया है। पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर बिहार के अधिकांश क्षेत्रों में 9 से 11 अगस्त के बीच हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर मध्यम से भारी वर्षा भी हो सकती है, जबकि अन्य दिनों में भी हल्की बारिश के आसार बने रहेंगे।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस अवधि में अधिकतम तापमान 31 से 35 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 26 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। सुबह के समय सापेक्षिक आर्द्रता 80 से 90 प्रतिशत और दोपहर में 50 से 60 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वहीं पूर्वी अथवा दक्षिण-पूर्वी दिशा से 5 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है।
पिछले तीन दिनों के मौसम का आकलन बताते हुए विश्वविद्यालय ने कहा कि इस दौरान औसत अधिकतम तापमान 32.0 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। औसत वर्षा 96.6 मिमी रिकॉर्ड की गई, जबकि सुबह की सापेक्षिक आर्द्रता 93 प्रतिशत और दोपहर में 84 प्रतिशत रही।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि मक्का की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए समय पर निकौनी करें। जिन खेतों में खरपतवारनाशी का प्रयोग नहीं हुआ है, वहां कतारों के बीच खुरपी से निकौनी कर 40 किलोग्राम यूरिया प्रति हेक्टेयर की ऊपरी मात्रा दें और मिट्टी चढ़ाएं।
वर्तमान मौसम को परवल की खेती के लिए भी अनुकूल बताया गया है। किसानों को राजेंद्र परवल-1, राजेंद्र परवल-2, राजेंद्र परवल-3, स्वर्ण रेखा, स्वर्ण अलौकिक और स्वर्ण सुरुचि जैसी अनुशंसित किस्मों की बुआई करने की सलाह दी गई है।


मिर्च की खेती के लिए अगस्त माह को उपयुक्त बताते हुए उठी हुई क्यारियों में बुआई करने तथा बीजोपचार के बाद ही रोपाई करने की सलाह दी गई है। वहीं फूलगोभी की मध्यकालीन किस्मों की बुआई भी इस समय करने की अनुशंसा की गई है।
कद्दूवर्गीय सब्जियों में फल मक्खी की नियमित निगरानी करने, मिथाइल यूजेनॉल ट्रैप लगाने तथा प्रकोप बढ़ने पर वैज्ञानिक सलाह के अनुसार कीटनाशक का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। जलभराव से बचाने के लिए बेलों को मचान पर चढ़ाकर रखने का सुझाव भी दिया गया है।
विश्वविद्यालय ने आम, लीची, कटहल, अमरूद, जामुन, शरीफा और नींबू जैसे फलदार पौधों की नई पौध लगाने के लिए वर्तमान समय को उपयुक्त बताया है। साथ ही किसानों को केवल अधिकृत नर्सरियों से पौधे खरीदने और रोपाई से पहले गड्ढों में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद डालने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा अधिक आर्द्रता को देखते हुए भंडारित अनाज की नियमित निगरानी करने और कीटों से बचाव के लिए आवश्यक प्रबंधन उपाय अपनाने की भी अपील की गई है। यह कृषि मौसम परामर्श डॉ. ए. सत्तार, वरीय वैज्ञानिक एवं नोडल पदाधिकारी, ग्रामीण कृषि मौसम सेवा, पूसा द्वारा जारी किया गया है।