-आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना का नवम दीक्षांत समारोह आयोजित
-राज्यपाल सह कुलाधिपति श्री आरिफ मोहम्मद खान ने की आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के नवम दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता ।
दो हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को मिली उपाधि, 63 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल और 67 को पीएच.डी. की उपाधि दी गई।
बिहार सरकार के मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत एवं इलाहाबाद हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश श्री पियूष अग्रवाल को विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी गई।
पटना। ब्यूरो।
आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय का नवम् दीक्षांत समारोह 24 नवंबर 2025, सोमवार, को सम्राट अशोक कंन्वेंशन सेंटर, बापू सभागार, पटना में आयोजित किया गया। दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता महामहिम राज्यपाल सह कुलाधिपति श्री आरिफ मोहम्मद खान जी ने की। इस समारोह में राज्यपाल बिहार के प्रिंसिपल सेकेट्ररी श्री राबर्ट एल चोंग्यू भी बतौर अतिथि शामिल हुए। दीक्षांत समारोह में दो हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को उपाधि दी गई। इनमें 63 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल भी दिया गया। इस दौरान 67 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी गई। बिहार सरकार के मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत और इलाहाबाद हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश श्री पियूष अग्रवाल को विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी गई।
महामहिम राज्यपाल सह कुलाधिपति श्री आरिफ मोहम्मद खान ने दीक्षांत समारोह में उपाधि धारण करने वाले सभी शोधार्थी-विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह दीक्षांत है शिक्षांत नहीं, ज्ञान अर्जन के लिए सदैव जागरूक एवं प्रयासरत रहना चाहिए एवं स्वाध्याय निरंतर जारी रखना चाहिए तथा अर्जित ज्ञान का व्यापक प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए। मेरी आशा है कि आप सभी जिस भी क्षेत्र में जाएँ, अपने कार्य को पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ करें। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में राष्ट्र अपने उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ रहा है। लडकियों द्वारा सर्वाधिक स्वर्णपदक हासिल करने पर महामहिम राज्यपाल सह कुलाधिपति महोदय ने सभी को बधाई दी और अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त की।
ज्ञान के हर विधा में प्रचुर ज्ञान उपलब्ध हों जो भारत को विकसित करने में अपना योगदान दे सके। ज्ञान विज्ञान के साथ-साथ संस्कार भी आवश्यक है जो आत्मनियंत्रण एवं आत्मसंयम से प्राप्त हो सकता है। मनुष्य का श्रेष्ठतम धर्म ही आत्मनियंत्रण है। इस संदर्भ में उन्होंने वृहदारण्यक उपनिषद् में वर्णित आकाशीय ध्वनि ‘दा दा दा’ को उद्धृत किया गया जिसका तीन अर्थ है, यथाः- दमयत् (आत्म नियंत्रण), दान एवं दया जो ईश्वर द्वारा प्रदत्
सभी प्राणियों के लिए दिव्य ज्ञान है। उनके द्वारा आगे कहा गया कि धर्म वही है जो आपने में संवेदना जागृत करे ताकि आप दूसरे की पीड़ा को समझ सके।
माननीय कुलाधिपति महोदय द्वारा हितोपदेश के शूक्त अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम् । उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥ को उद्धृत करते हुए बताया गया कि अपना और पराया की गणना छोटे विचार वाले करते हैं। उदार हृदय वालों के लिए सम्पूर्ण धरती ही परिवार है। ज्ञान तबतक सार्थक नहीं है जबतक वह हमारे जीवन एवं कार्यों में परिलक्षित नहीं हो। प्राचीन समृद्ध संस्कृति का गर्व महसूस करना ही काफी नहीं है। हमारा जीवन तभी सार्थक होगा जब हमारा वर्तमान एवं भविष्य अतित से ज्यादा समृद्ध हो। महात्मा गांधी एवं सर्वपल्ली राधाकृष्णन के विचारों के अनुरूप भेदभावरहित, करूणायुक्त संवेदनशील समाज के सर्वांगीण विकास में अपना सार्थक योगदान दें।
इस अवसर पर राज्यपाल सह कुलाधिपति महोदय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के स्त्रोंतो वेद और उपनिषदों से श्लोंको का उद्धृत करते हुए बताया कि भारतीय संस्कृति किसी भी आत्मा में परमात्मा स्वरूप देखती है एवं महिला और पुरूष के बीच भेद नहीं किया गया है। भारत विश्व के अग्रणी लोकतांत्रिक देशों में है जहां महिलाओं को मताधिकार दिया गया। महिला एवं पुरुषों के बीच भेदभाव भारतीय संस्कृति के विपरीत है। महिला सशक्तिकरण केवल नीतिगत नहीं अपितु आस्था का केन्द्र है।
अंत में उनके द्वारा सभी छात्र-छात्राओं को आह्वान किया गया कि संयम सेवा समर्पण भाव से अपना योगदान करें जिससे कि सभी प्राणी सुखी रहें।

माननीय कुलपति प्रो डॉ शरद कुमार यादव ने सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के आदर्श वाक्य “सत्य धर्माय दृष्टये” का स्मरण करते हुए कहा कि वर्ष 2010 में अपनी स्थापना के बाद से, खास तौर पर तकनीकी शिक्षा को सुव्यवस्थित तथा नियमित करने में विश्वविद्यालय ने प्रतिबद्धता दिखाई है। हमारे विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षण, अनुसंधान और रचनात्मक प्रयासों के माध्यम से वैश्विक मानकों की उच्च शिक्षा प्रदान करना है। ज्ञान और मानवीय समझ का विस्तार करने और समाज की चुनौतियों से निपटने के लिए विश्वविद्यालय ने उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण सृजित किया है। हमारा कैंपस तकनीकी, व्यावसायिक तथा गैर-पारंपरिक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन देने के लिए आवश्यक सभी सुविधाओं से युक्त है।
माननीय कुलपति ने बताया कि आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना द्वारा बिहार में स्टेम सेल तकनीक के अध्ययन एवं शोध के लिए स्कूल की स्थापना की गई है। साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा के ज्ञान शिखर खगोल विज्ञान यानी एस्ट्रोनॉमी का अध्ययन अध्यापन प्रारंभ किया गया है। इन दोनों स्कूलों में विश्वस्तरीय संसाधन और तकनीक उपलब्ध कराने के लिए विश्वविद्यालय प्रतिबद्ध है। साथ ही इन संस्थानों से विश्व के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ सहयोग-समझौते कर विद्वानों को विश्वविद्यालय से जोड़ा जा रहा है।
माननीय कुलपति ने कहा कि आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना द्वारा अपनी स्थापना के उद्देष्यों की प्राप्ति हेतु लगातार प्रयत्न किया जा रहा है। यह विदित है कि वर्तमान में विश्वविद्यालयों की रैंकिंग उनके द्वारा प्रदान की जा रही डिग्री पर ही निर्भर नहीं है, अपितु उनके द्वारा शोध एवं विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदानों का आधार प्रमुख है। अतः विश्वविद्यालय द्वारा स्कूल ऑफ नैनोसाइंस एंड नैनोटेक्नोलॉजी, स्कूल ऑफ स्टेम सेल टेक्नोलॉजी, पाटलिपुत्र स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, स्कूल ऑफ फिलॉसफी, स्कूल ऑफ एस्ट्रोनॉमी, स्कूल ऑफ ज्योग्रफिकल स्टडीज, स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन तथा स्कूल ऑफ रिवर स्टडीज में शिक्षण में उत्कृष्टता तथा खोज की प्राप्ति एवं नवीन विधाओं के क्षेत्र में प्रगति का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही, विश्वविद्यालय द्वारा प्राचीन एवं अन्य नवीन विधाओं में ज्ञान की खोज एवं प्रसार तथा उत्कृष्टता प्राप्त करने हेतु लगातार प्रयास किया जा रहा है ताकि विश्वविद्यालय अपनी स्थापना के मूल उद्देश्यों को प्राप्त करने में सफल हो सके ।
इस मौके पर विश्वविद्यालय की निम्नलिखित उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गयाः-
1. विश्वविद्यालय द्वारा राज्य में पहला Master of Science (M.S.) (By Research) in Stem Cell Biology and Regenerative Medicine में पाठ्यक्रम प्रारंभ किया गया है। विदित हो कि यह शैक्षणिक क्षेत्र नवीन चिकित्सा विधा के रुप में विकसित हो रहा है।
2. School of Journalism and Mass Communication द्वारा राज्य में पहला Film Making पाठ्यक्रम का प्रारंभ किया गया है।
3. अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए Photography एवं Film Making का निःशुल्क Certification Course प्रारंभ किया गया है।
4. भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU), नई दिल्ली द्वारा विश्वविद्यालय में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक विकास केन्द्र (AIU-AADC) की स्थापना की गई है जिसमें विश्वविद्यालय को वित्तीय सहायता भी प्रदान किया गया है। इसके तहत बीते अकादमिक सत्र में छह गुरू दक्षता कार्यकम आयोजित किए गए।
5. स्टार्ट-अप को प्रोत्साहित करने हेतु विश्वविद्यालय में इनक्यूबेशन सेंटर की स्थापना की गयी है।
6. NEP 2020 के दिशा-निर्देष के अनुरुप विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों को तैयार / संशोधित किया गया है यथाः– Master of Science (M.S.) (By Research), MBA (Integrated) तथा MA पाठ्यक्रम इत्यादि।
7. Bar Council of India, New Delhi द्वारा विधि पाठ्यक्रम को संचालित करने की अनुमति प्रदान किया गया है।
8. AICTE, New Delhi द्वारा M.Tech पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति प्रदान किया गया है।
9- राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक एवं तकनीकी कुल 19 संस्थानों (Indian Economics Association; Sarla Birla University, Ranchi, Jharkhand; Survey of India; National Institute of Ayurveda, Jaipur; Jai Prakash University, Chapra; Bihar Startup Fund Trust; Chandragupt Institute of Management, Patna; Association of Indian Universities; SatCom Industry Association (SIA-India); The Indus Entrepreneurs (TiE), Patna; IGIMS, Patna; D. Y Patil International University, Pune; National Institute of Electronics & Information Technology (NIELIT), Patna; National Institute of Hydrology, Patna; CodiMaths, Noida; GUVI HCL, Chennai; IIT Patna; BASU, Patna; Amity University, Patna) के साथ समझौता ज्ञापन किया गया ताकि शिक्षण एवं शोध में उत्कृष्टता प्राप्त किया जा सके।
10. लोक हित एवं विशेष ज्ञान से संबंधित नवीन विधा के पाठ्यक्रमों यथा : River Studies, Stem Cell Technology, Astronomy, Nanoscience and Nanotechnology आदि विषयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम का संचालन किया जा रहा है।
11. River Flooding Warning and Dissemination पर International Seminar, in collaboration with Danish hydraulic institute, Denmark, का आयोजन किया गया ताकि बाढ़ आपदा नियंत्रण हेतु नवीनतम ज्ञान का आदान-प्रदान किया जा सके।
12. School of Astronomy के परामर्शी प्रो० राजमनी प्रसाद सिन्हा को उनके शैक्षणिक योगदान हेतु Lalit Narayan Mithila University द्वारा Degree of Doctor of Science (Honooris Causa) प्रदान किया गया है।
13. School of Nanoscience and Nanotechnology द्वारा 150 Research Papers प्रकाशित किया गया है तथा स्कूल के शिक्षक डॉ० राकेश कुमार सिंह को Chancellor (Governor) Award for best Young Teacher with contributions in modern field of Nano Science प्रदान किया गया है।
14. Bihar Board of Open Schooling and Education (BBOSE), पटना के साथ एकरारनामा कर “100 Hours of Advanced Amanat Training Programme” राज्य के अमीन को प्रशिक्षित करने के लिए आयोजित किया गया।
15. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० शरद कुमार यादव द्वारा विश्व स्तरीय शैक्षणिक कार्यकम The India Achievers Programme and the India-UK-Ireland Higher Education Summits, 13th to 19th February 2025, London, U.K में भाग लिया गया एवं World Congress on Virology and Infectious Diseases, 7th and 8th July 2025 Prague, Czech Republic में रिसर्च पेपर (Recent Developments in Herpes Virus Vaccines) प्रस्तुत किया गया एवं विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रगति हेतु विश्वस्तरीय संस्थानों से सहयोग प्राप्त करने हेतु सफल प्रयास किया गया।
16. विश्वविद्यालय द्वारा दिनांक 22.12.2025 को AIU East Zone Vice Chancellor’s Meet-2025-26 आयोजित किया जा रहा है।
आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय ने नवम दीक्षांत समारोह में प्रशासन के क्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले बिहार सरकार के मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत और कानून के क्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धियां हासिल कर चुके इलाहाबाद हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश श्री पियूष अग्रवाल जी को विश्वविद्यालय द्वारा D.Litt. की मानद उपाधि दी गई। इन विभूतियों का जीवन वृत्त विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ निरंजन प्रसाद यादव ने किया। इन्होंने मुख्य सचिव, श्री प्रत्यय अमृत जी के बारे में बताया कि बिहार के निरंतर प्रगति में श्री प्रत्यय अमृत का योगदान उल्लेखनीय है। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड को पुर्नजीवित कर एक लाभकारी संस्था में बदला गया एवं बिहार में सड़क निर्माण में भी उनका योगदान उद्धृत किया गया। बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के कार्यकाल में बिहार को शतप्रतिशत विद्युतीकृत राज्य बना दिया गया। वर्ष 2020-21 में कोविड संक्रमण रोकथाम, स्वास्थ्य संसाधनों का प्रबंधन और आपातकालीन व्यवस्थ संभालने में स्वाथ्य विभाग के प्रधान सचिव के रूप में श्री प्रत्यय अमृत के द्वारा अहम भूमिका निभाई गयी। इनके उत्कृष्ट कार्यों के कारण वर्ष 2011 में प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार दिया गया जो उस वर्ष व्यक्तिगत श्रेणी में चुने वाले एक मात्र भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी थे।
श्री पियुष अग्रवाल, माननीय न्यायाधीश, माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद में कानून को स्थापित करने एवं न्यायिक जवाबदेही पर दिए गए निर्णयों के कारण नागरिकों का न्यायिक व्यवस्था में विश्वास स्थापित हुआ है। एक सफल टैक्स अधिवक्ता से एक सम्मानित न्यायाधिश बनने का उनका सफर में उनकी विशेषज्ञता, ईमानदारी एवं कानून के शासन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता परिलक्षित होती है।
विश्वविद्यालय श्री प्रत्यय अमृत एवं न्यायमूर्ति श्री पियूष अग्रवाल के कमशः प्रशासनिक एवं न्यायिक योगदानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय द्वारा डी.लीट. की मानद उपाधि देते हुए विश्वविद्यालय बहुत ही गौरवांवित महसूस किया गया।
दीक्षांत समारोह में राज्यपाल सह कुलाधिपति ने 63 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल एवं प्रमाणपत्र प्रदान किया। इनमें 47 छात्राएँ तथा 16 छात्र शामिल रहे। ये मेडल विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम, नवाचार एवं अकादमिक उपलब्धियों के आधार पर प्रदान किए गए।
आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग के आंकडों के अनुसार कुल 29,955 विद्यार्थी विश्वविद्यालय से विभिन्न संस्थानों एवं संकायों से सफलतापूर्वक उत्तीर्ण हुए हैं। इनमें से 2,076 विद्यार्थियों ने नवम दीक्षांत समारोह में भाग लेने हेतु पंजीकरण कराया है,
Passed Out
Registered
Male
16497
922
Female
13458
1154
Total
29955
2076
विश्वविद्यालय में मेडिकल, इंजीनियरिंग, सोशल साइंस एवं शिक्षा संकायों में शोध एवं अकादमिक गतिविधियाँ निरंतर प्रगति पर हैं। संबद्ध संस्थानों में किए जा रहे शोध कार्यों के अंतर्गत कुल 67 शोधार्थियों ने अपना Ph.D. शोधकार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया है, इन्हें भी उपाधि दी गई। इसमें सामाजिक विज्ञान संकाय के 31, शिक्षा संकाय से 06, नैनोविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से 08, अभियंत्रण संकाय के विभिन्न विभागों से 06, चिकित्सा संकाय के दंत चिकित्सा विभाग से 06 पीएच.डी. और चिकित्सा संकाय के ही अन्य विभिन्न विभागों के 10 शोधार्थी शामिल हैं।
Male-Female / Course-wise Data
Faculty
Female
Male
Total
Certificate / Others
58
40
Nursing/Paramedical
4580
3244
98
7824
PG-Education
70
38
108
PG-M.Tech/MA/MSc.
90
226
316
PG-Medicine
477
736
1213
PG-Nursing/Paramedical
263
146
409
PG-Vocational
132
306
438
Ph.D
35
32
67
UG-B.Tech
158
598
756
UG-Education
4241
3936
8177
UG-Medicine
1144
1829
2973
UG-Pharmacy
453
2138
2591
UG-Vocational
1757
3228
4985
Grand Total
13458
16497
29955
Registered Data
Faculty
Female
Male
Total
Nursing / Paramedical
547 425
972
PG-Education
4
7
11
PG-M.Tech/MA/MSc.
11
17
29
PG-Medicine
61
69
130
PG-Nursing/Paramedical
40
19
59
PG-Vocational
8
8
16
UG-Education
117 33
149
UG-Medicine
303
276
579
UG-Pharmacy
10 27
37
UG-Vocational
Ph.D
Grand Total
33 25 58
20 16 36
1154
922
2076
दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति प्रो. एस.एन. गुहा जी एवं सभी पूर्व कुलपतिगण, विश्वविद्यालय की सभा, कार्यकारिणी परिषद् के माननीय सदस्यगण सहित बिहार सरकार की कई संस्थानों के गणमान्यजन, कुलसचिव डॉ. निरंजन प्रसाद यादव,परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजीव रंजन, वित्त अधिकारी इंजीनियर रामजी सिंह, सभी संकायाध्यक्षों, उपसचिव डॉ कुमारी अंजना, सभी विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय के सभी प्राध्यापकगण, पदाधिकारी एवं कर्मी, प्रिन्ट, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजीटल मीडिया के प्रतिनिधिगण आदि उपस्थित रहे।











