-सरकारी उपेक्षा की शिकार बनी पुरानी बागमती, सड़े पानी की बदबू से बेहाल ग्रामीण; पुनर्जीवन की उठी मांग
मुजफ्फरपुर (गायघाट)। गायघाट प्रखंड के बेरुआ गांव से होकर गुजरने वाली पुरानी बागमती नदी आज सरकारी उपेक्षा का शिकार बनकर रह गई है। कभी गांव की जीवनरेखा मानी जाने वाली यह नदी अब ठहरे हुए सड़े पानी और दुर्गंध का कारण बन गई है। नदी का प्राकृतिक प्रवाह रुक जाने से ग्रामीणों को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है, जबकि किसानों की सिंचाई व्यवस्था भी पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले बागमती नदी की अविरल धारा से खेती, पशुपालन और दैनिक जरूरतों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध रहता था। लेकिन सरकार द्वारा नदी का प्रवाह बंद किए जाने के बाद हालात लगातार बिगड़ते गए। आज नदी में पानी ठहर जाने से दुर्गंध फैल रही है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों का जीवन मुश्किल हो गया है।

स्थानीय किसानों के अनुसार सिंचाई के अभाव में फसलें प्रभावित हो रही हैं और खेती का खर्च बढ़ गया है। वहीं ग्रामीणों को रोजमर्रा के उपयोग के लिए भी पानी की समस्या झेलनी पड़ रही है। उनका आरोप है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग का ध्यान इस ओर दिलाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई।
ग्रामीणों ने सरकार, जनप्रतिनिधियों और जल संसाधन विभाग से पुरानी बागमती नदी के पुनर्जीवन, जल प्रवाह बहाल करने और स्थायी समाधान के लिए शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते नदी को पुनर्जीवित नहीं किया गया तो जल संकट और पर्यावरणीय समस्याएं आने वाले दिनों में और गंभीर हो सकती हैं।












