-महेशपुर में मिट्टी की कला को संवार रहे कारीगर, बाजार और उचित मूल्य की दरकार
बंदरा/मुजफ्फरपुर(दीपक)। मिट्टी केवल मिट्टी नहीं, बल्कि लोकसंस्कृति, परंपरा और मेहनतकश परिवारों की जीविका से जुड़ी विरासत है। मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड के महेशपुर गांव में आज भी कई परिवार अपनी मेहनत और हुनर के दम पर इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं।
कभी यहां हाथों से मिट्टी के बर्तन, दीये और दैनिक उपयोग की कई वस्तुएं तैयार की जाती थीं। समय के साथ तकनीक के विकास ने इस कला को नया स्वरूप दिया है। अब मशीनों और विद्युत उपकरणों की मदद से मिट्टी से दीये, कप, मूर्तियां और विभिन्न कलात्मक वस्तुएं तैयार की जा रही हैं।
शुक्रवार सुबह महेशपुर गांव पहुंचकर इस पारंपरिक कार्य में जुटे परिवारों से मुलाकात की गई और उनकी समस्याओं को करीब से समझने का अवसर मिला। कलर पंडित, भुट्टा पंडित, उमेश पंडित, रामकिशोर पंडित समेत कई परिवार आज भी पूरी लगन से मिट्टी की कारीगरी को आगे बढ़ा रहे हैं।

कारीगरों की सबसे बड़ी समस्या उनके उत्पादों के लिए उचित मूल्य और स्थायी बाजार का अभाव है। उनका कहना है कि यदि आधुनिक मशीन, प्रशिक्षण, कच्चा माल, आसान ऋण और बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में सरकारी स्तर पर पहल हो, तो यह पारंपरिक कला रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन सकती है।
समाजसेवी एवं सामाजिक चिंतक श्याम किशोर ने कहा कि हुनर को यदि उचित सहयोग और बाजार मिल जाए तो मेहनतकश हाथ रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं। उन्होंने मिट्टी की कला से जुड़े परिवारों को सम्मान, उचित मूल्य और बाजार उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।











