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भाई की गोली मार कर हत्या मामले में आजीवन कारावास व दो लाख का अर्थदंड

चंपारण की खबर::

-भाई की गोली मार कर हत्या मामले में आजीवन कारावास व दो लाख का अर्थदंड

मोतिहारी / राजन द्विवेदी ।

21 वीं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार राय ने छोटे भाई द्वारा अपने सहोदर बड़े भाई को गोली मारकर हत्या कारित करने मामले में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास व दो लाख रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थ दंड नहीं देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। वहीं अर्थदंड वसुल पाये जाने पर राशि मृतक के एक मात्र मासुम पुत्र को देय होगी। सजा मेहसी थाना के कसवा मेहसी सराय वार्ड न0 14 निवासी शकिलउर रहमान के पुत्र सफाउर रहमान उर्फ अरमान को हुई। मामले में शकिलउर रहमान ने मेहसी थाना कांड़ संख्या-211/2021 दर्ज कराते हुए अपने ही हत्यारा पुत्र को नामजद किया था। जिसमें कहा था कि मृतक जियाउर रहमान उसके चार पुत्रों में सबसे बड़ा था। वह घर पर पोलेट्री फार्म चलता था। बाद में वह पोल्ट्रीफार्म अपने छोटे भाई सफाउर रहमान उर्फ अरमान को सौंप कर दिल्ली चला गया। परंतु उसके भाई अच्छा से पाॅल्टी फार्म नहीं चलाया और फार्म घाटा में चलने लगा। तब सूचक पाॅल्टी फार्म सफाउर रहमान से लेकर जियाउर रहमान के दिशानुसार चलाने लगा। जियारउ रहमान की शादी घटना के महज छह माह पूर्व हुई थी। वह दिल्ली से अपने ससुराल आया था, जहां से वह 31 अगस्त 2022 की सुबह घर आया और अपने घर में जाकर सो गया। सुबह करीब 8 बजे गोली चलने की आवाज सुनकर परिजन दौड़े तो देखे कि सफाउर रहमान उर्फ अरमान दो नाली बंदूक से अपने भाई जियाउर रहमान को तीन गोली मारा। जिससे उसकी मौत हो गई। उक्त दोनाली बंदूक उसके दादा मोतिउर्रहमान का लाईसेसी था,जिसे वह उनके बेडरूम से चोरी कर लाया था। सत्रवाद 283/2022 विचारण के दौरान अपर लोक अभियोजक ईश्वरचंद दूबे एवं सहायक अधिवक्ता मो0 शहाबुदीन ने 15 गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत कर अभियोजन पक्ष रखा। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद धारा 302 भादवि एवं 27 आमर्स एक्ट में दोषी पाते हुए उक्त सजा सुनाये।

– घटना के महज छह माह पूर्व हुई थी मृतक की शादी :

घटना के महज छह माह पूर्व फरवरी 2021 में जियाउर रहमान की शादी हुई थी। पाॅल्टी विवाद को लेकर उसके भाई ने 31 अगस्त 2022 को गोलीमार कर हत्या कर दी। उस समय मृतक की पत्नी गर्भवती थी। जो बाद में एक बच्चे की मां बनी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दी तथा ससमय आरोप पत्र न्यायालय में समर्पित कर दिया। न्यायालय में त्वरित निष्पादन के तहत महज 22 माह के अंदर ही न्यायालय ने विचारण की प्रक्रिया पूरी कर अभियुक्त को दोषी पाते हुए उक्त सजा सुनाई।