-डीएम की अध्यक्षता में जिला समन्वय समिति की बैठक, जनहित के मामलों के त्वरित समाधान का निर्देश
मुजफ्फरपुर, 29 अगस्त। जिलाधिकारी कुमार गौरव की अध्यक्षता में शनिवार को समाहरणालय में जिला समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों की विकासात्मक एवं लोक-कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को आम जनता की समस्याओं का पूरी संवेदनशीलता के साथ त्वरित समाधान करने तथा सरकारी योजनाओं का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
जिलाधिकारी ने कहा कि योजनाओं का सफल क्रियान्वयन जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी विभागों के अधिकारी आपस में बेहतर समन्वय स्थापित कर जनहित के कार्यों को तेजी से पूरा करें। क्षेत्रीय पदाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि आम लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें। अधिकारियों को जिम्मेदारी, जवाबदेही और संवेदनशीलता के साथ कार्य करना होगा।
बैठक में ग्रामीण विकास, राजस्व, कल्याण, पंचायती राज, आईसीडीएस, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, श्रम, जीविका, पथ निर्माण, विद्युत, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण, नगर विकास, जल संसाधन, कृषि, सामाजिक सुरक्षा, समाज कल्याण और खेल सहित विभिन्न विभागों के कार्यों की समीक्षा की गई। भूमि उपलब्धता, सीमांकन, एनओसी और अतिक्रमण जैसे लंबित मामलों को संबंधित विभागों और अंचल अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर शीघ्र निष्पादित करने का निर्देश दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसे मामलों में अनुमंडल पदाधिकारी पर्यवेक्षण करेंगे और अपर समाहर्ता नियमित अनुश्रवण करेंगे।
बैठक में जल-जीवन-हरियाली अभियान, वीबी जी राम जी, समरसता संकल्प अभियान, विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए विद्यार्थी सहयोग शिविर, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण, पंचायत सरकार भवन, सोलर स्ट्रीट लाइट, हर घर नल का जल और हर खेत को सिंचाई का पानी सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
आईसीडीएस की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में कुल 17 बाल विकास परियोजनाएं हैं। प्रत्येक परियोजना में 20 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण का वार्षिक लक्ष्य निर्धारित है। इस प्रकार कुल 340 आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण होना है। अब तक 185 भवनों के निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है। जिलाधिकारी ने शेष भवनों के लिए भी जल्द जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश अंचलाधिकारियों को दिया। अपर समाहर्ता को भूमि उपलब्धता की नियमित निगरानी करने को कहा गया। सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर शुद्ध पेयजल और शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा अन्नप्राशन, गोदभराई और वीएचएसएनडी का आयोजन नियमानुसार कराने का निर्देश भी दिया गया।
कल्याण विभाग की समीक्षा के दौरान बताया गया कि पोखरैरा, राजवाड़ा, बोचहां और मुरौल में चार डॉ. भीमराव अम्बेदकर आवासीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें कुल 1116 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। इन विद्यालयों में विद्यार्थियों को आवासन, अध्ययन और भोजन सहित विभिन्न सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्मार्ट क्लास, डिजिटल क्लास, पुस्तकालय और खेलकूद की सुविधा भी उपलब्ध है। पारू, मोतीपुर, सकरा, बंदरा और कुढ़नी में पांच नए आवासीय विद्यालयों की स्वीकृति दी गई है, जो निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं।
जिले के छह डॉ. भीमराव अम्बेदकर कल्याण छात्रावासों में 480 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। इन्हें मुख्यमंत्री अनुदान योजना के तहत प्रतिमाह दो हजार रुपये तथा मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना के तहत 15 किलो खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। सिकंदरपुर में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की छात्राओं के लिए सावित्रीबाई फुले छात्रावास के निर्माण की स्वीकृति भी दी गई है।

डीएम ने पंचायत सरकार भवनों के निर्माण की नियमित निगरानी करने और कार्य समय पर पूरा कराने का निर्देश जिला पंचायत राज पदाधिकारी को दिया। उन्होंने बताया कि जिले की पंचायतों एवं नगर निकायों में सहयोग शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। अब तक प्राप्त आवेदनों में 94 प्रतिशत से अधिक का गुणवत्तापूर्ण निष्पादन किया जा चुका है। नए राशन कार्ड बनाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है तथा 373 पंचायतों में पंचायत विकास दिवस का आयोजन किया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने बताया कि पिछले करीब चार महीनों में जिले में 14 पंचायत सरकार भवनों को ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित कर क्रियाशील किया गया है, जबकि 41 अन्य पंचायत सरकार भवनों का निर्माण शुरू हो चुका है। विभिन्न पंचायतों में 29 कन्या विवाह मंडप का शिलान्यास किया गया है। जिले में करीब 40 सड़क, पुल-पुलिया और फ्लाईओवर का निर्माण तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।
जिला उद्योग केंद्र की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति-जनजाति उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री अति पिछड़ा वर्ग उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना और मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक उद्यमी योजना का लक्ष्य के अनुरूप बेहतर क्रियान्वयन करने का निर्देश दिया। लाभुकों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय किस्त का भुगतान नियमानुसार समय पर करने को कहा गया।
लोक शिकायत निवारण एवं आरटीपीएस मामलों की समीक्षा करते हुए डीएम ने कहा कि केवल शिकायतों का निष्पादन पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनता की संतुष्टि सर्वोपरि है। उन्होंने सभी लोक प्राधिकारों एवं अधिकारियों को शिकायतों का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निष्पादन करने का निर्देश दिया। आरटीपीएस में एक्सपायर्ड मामलों की संख्या हर हाल में शून्य रखने को कहा गया।
भूमि विवादों के समाधान के लिए अंचलाधिकारियों और थानाध्यक्षों की संयुक्त बैठक की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक शनिवार सीओ और थानाध्यक्ष की संयुक्त शनिवारीय बैठक नियमित रूप से आयोजित हो और बैठकों की जानकारी भू-समाधान पोर्टल पर अपलोड की जाए।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सहयोग पोर्टल, सीपीग्राम, जिला जनता दरबार सहित विभिन्न माध्यमों से प्राप्त आवेदनों का त्वरित निष्पादन करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ जनहित के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की शिथिलता, लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।












