-आरबीबीएम कॉलेज में स्त्री-उपन्यासों पर हुआ मंथन,हेलेन केलर के जीवन पर आधारित नाटक ने मोहा मन
मुजफ्फरपुर। रामवृक्ष बेनीपुरी महिला महाविद्यालय (आरबीबीएम) और अभिधा प्रकाशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शनिवार को समापन हो गया। ‘हिन्दी पत्रकारिता, देहाती दुनिया और स्त्री-उपन्यास’ विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी के दूसरे दिन स्त्री लेखन, महिला अस्मिता, स्वतंत्रता, सामाजिक बदलाव और संघर्ष के विविध पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। महाविद्यालय के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए साहित्यकारों, शोधार्थियों और वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
दिन की शुरुआत चौथे सत्र ‘स्त्री-उपन्यास-1’ से हुई। इसमें प्रख्यात लेखिका अनामिका के उपन्यास ‘दूर देश के परिंदे’ और वंदना राग के उपन्यास ‘सरक फंदा’ पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने दोनों उपन्यासों के कथ्य, स्त्री अनुभवों की अभिव्यक्ति और समकालीन सामाजिक यथार्थ का विश्लेषण किया। बदलते परिवेश में स्त्री अस्मिता, स्वतंत्रता और जीवनबोध से जुड़े सवाल भी प्रमुखता से उठाए गए।

पांचवें सत्र में लेखिका गीताश्री के उपन्यास ‘कैद बाहर’ पर विशेष परिचर्चा हुई। अपने लेखकीय वक्तव्य में गीताश्री ने उपन्यास की पृष्ठभूमि और पात्रों के माध्यम से स्त्री स्वतंत्रता एवं संघर्ष के विभिन्न पहलुओं को रेखांकित किया। वक्ता ममता रानी और सुनीता गुप्ता ने उपन्यास के अंतर्वस्तु का विश्लेषण किया। इसी सत्र में रजनी गुप्ता के उपन्यास ‘जस्ट चिल यार’ पर रामेश्वर द्विवेदी और शिप्रा प्रभा ने अपने विचार साझा किए।
शाम के छठे सत्र में सुप्रसिद्ध समाजसेविका हेलेन केलर के जीवन पर आधारित एकल नाटक ‘अंधेरे से प्रकाश की ओर’ का मंचन किया गया। कोलकाता की कलाकार पौलौमी घोष ने अपने एकल अभिनय से हेलेन केलर के संघर्ष, दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मनिर्भरता की प्रेरक यात्रा को जीवंत किया। नाटक का निर्देशन जम्मू के लकी गुप्ता ने किया। मंचन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से जीवन में नई राह बनाई जा सकती है।
संगोष्ठी के अंतिम सत्र में प्रसिद्ध कवयित्री अनामिका की अध्यक्षता में काव्य पाठ का आयोजन हुआ। अनीता सिंह के संचालन में वंदना विजयलक्ष्मी, निलिमा झा, सुमेधा पाठक, सीमा स्वधा और चेतना वर्मा सहित कई कवयित्रियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। अंत में अशोक गुप्ता के धन्यवाद ज्ञापन के साथ दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ।













