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स्पेशल: बिहार आकर दीवानगी बढ़ा गया पोस्टर ब्वॉय,बाबा बागेश्वर के बढ़े दीवाने..

अनूप नारायण सिंह। पटना।

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री उर्फ़ बाबा बागेश्वर अपने पांच दिवसीय पटना दौरे के बाद वापस लौट चुके हैं लेकिन अपने पीछे ‘पागलों’ की एक बड़ी जमात छोड़ गए हैं। अपने भक्तों को वे पागल कहकर संबोधित करते थे। बाबा की हनुमंत कथा में उमड़ी लाखों की भीड़ ने राजनीतिक दलों को भी पगला दिया। उनके आने के पहले ही बिहार की राजनीति उनके समर्थन और विरोध में बंट गई थी। उनके दरबार में इतनी भीड़ उमड़ी जिसकी कल्पना किसी को भी नहीं थी। तमाम व्यवस्थाएं छोटी पड़ गईं। इस भीषण गर्मी में पीने के पानी के भी लाले पड़ गए लेकिन भीड़ पूरी तरह अनुशासित रही। इस भीड़ में हर जाति और वर्ग के लोग शामिल थे। उनके दरबार में 7 से 8 लाख लोग रोज आए। पटना से करीब 30 किलोमीटर दूर नौबतपुर के प्राचीन तरेत -पाली मठ में 13 से 17 मई तक बाबा बागेश्वर का दरबार सजा।
बाबा की लोकप्रियता को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए भाजपा ने कोई कसर नहीं छोड़ी। भाजपा के बड़े नेता जिसमें केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे, गिरिराज सिंह, मनोज तिवारी आदि शामिल थे, ने मंच पर बाबा की आरती उतारी और कथा में मौजूद रहे। भाजपा कठिन परिश्रम के बाद भी ऐसा ध्रुवीकरण नहीं कर पाई जैसा बाबा ने भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की मांग करके कर दी। इससे भाजपा स्वाभाविक रूप से धीरेन्द्र शास्त्री से जुड़ गई। जबकि राजद और जदयू ने दूरी बनाकर रखी।


नीतीश सरकार के मंत्री और लालू प्रसाद के पुत्र तेज प्रताप यादव ने तो बाबा के आने के पहले से ही उनका विरोध करना शुरू कर दिया था। उन्होंने घोषित किया था कि बाबा ने अगर हिन्दू -मुस्लिम की बात की तो उनका पुरजोर विरोध होगा और हवाई अड्डे पर उतरने नहीं दिया जायेगा। लेकिन बाबा के स्वागत में उमड़ी भीड़ और कथाओं में अपने खर्चे से चलकर आये लाखों लोगों के आगे उन्होंने खामोश रहना ही बेहतर समझा। उनकी देखा देखी जदयू के भी इक्के -दुक्के नेताओं ने विरोध में बयान दिए। नीतीश कुमार ने आरम्भ में चुप्पी साधे रखी। बाद में कहा कि किसी के आने जाने या अपने धर्म का प्रचार करने की सभी को आजादी है। किसी पर कोई रोक नहीं है। लेकिन देश का नाम कैसे कोई बदल देगा ? संविधान में ऐसा मुमकिन नहीं है। ऐसे लोग क्या जानते हैं। ये आजादी के बाद जन्मी पीढ़ी है। संघर्ष के बाद सभी ने मिलकर संविधान बनाया है।
राजद अपने आधार वोटों को लेकर कुछ ज्यादा ही चिंतित दिखी। हनुमंत कथा में अगड़े -पिछड़े सभी वर्गों के लोग आए थे। शायद यही राजद के लिए बेचैनी का सबब था। उसे अपना आधार वोट दरकता दिखाई दिया।हालांकि जदयू का रुख उससे भिन्न था। धीरेन्द्र शास्त्री के विरोध में वह उस तरह से आक्रामक नहीं थी जैसा राजद रहा। राजद के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव तक ने विरोध में बयान दिए। नीतीश के करीबी और बिहार के मंत्री अशोक चौधरी ने जरूर शुरू में उनके दौरे को लेकर नकारात्मक टिप्पणी की लेकिन बाद में जब बाबा आये तो जदयू की ओर से कोई बयानबाजी नहीं हुई। शायद नेतृत्व ने इस मसले पर अपने नेताओं को खामोश रहने को कहा हो।
इसके ठीक उलट राजद की तरफ से रोज विरोध में बयानबाजी होती रही। इस दौरान लालू प्रसाद भी पटना में ही थे ,लेकिन उन्होंने चुप्पी साधे रखी। हां पत्रकारों के पूछने पर उल्टा सवाल दाग दिया कि ”कौन बाबा” ? तेजप्रताप द्वारा बाबा का खुला विरोध करने की घोषणा के बाद उनके संगठन डीएसएस के कुछ लड़कों के साथ परेड करते हुए उनका वीडियो वायरल हुआ था। लेकिन सारी तैयारी धरी की धरी रह गई और बाबा लोगों को हिन्दू राष्ट्र बनाने का संकल्प दिला कर चले भी गए।
अपार भीड़ के सामने आकर बाबा का विरोध करने का साहस तो कोई नहीं जुटा सका लेकिन रात के अंधेरे में उनके पोस्टर पर कालिख पोत कर और उसे फाड़ कर खीझ जरूर उतारी गई। इस पर बाबा ने चुटकी लेते हुए कहा कि पोस्टर तो हटा दोगे लेकिन बिहार के लोगों के दिल से मुझे कैसे हटाओगे ?


बाबा बागेश्वर के दौरे को लेकर बिहार में सत्तारूढ़ महागठबंधन का अंतर्विरोध साफ़ -साफ़ नजर आया। महागठबंधन के ज्यादातर दल -जदयू, कांग्रेस और वाम दल बागेश्वर धाम का सीधा विरोध करने से बचते रहे वहीं राजद ने जमकर विरोध किया। राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने तो सीधे -सीधे धीरेन्द्र शास्त्री की गिरफ्तारी की मांग कर दी। लेकिन महागठबंधन के अन्य किसी दलों ने उनकी इस मांग का समर्थन नहीं किया। इस मसले पर राजद अलग -थलग नजर आई। हां, भाजपा ने इस विरोध का लाभ लेने की पूरी कोशिश की। उसके नेता लगातार धीरेन्द्र शास्त्री के पक्ष में बयान देते रहे। कई नेता तो साये की तरह बाबा के साथ लगे रहे।
बाबा के दौरे से आम लोगों में जो धार्मिक जोश और एकता देखी गई उसमें भाजपा अपने लिए संभावना देख रही है। बाबा के बिहार का दौरा करते रहने की घोषणा से भाजपा उत्साहित है तो राजद चिंता में है। भाजपा धीरेन्द्र शास्त्री को हिंदुत्व के नए पोस्टर ब्वॉय के रूप में देख रही है।भाजपा जातियों में बिखरे हिन्दुओं को एकजुट करने में उतनी सफल नहीं हो पाई जैसा धीरेन्द्र शास्त्री के एक दौरे ने कर दिखाया।
बाबा ने कुछ माह बाद मुजफ्फरपुर और फिर गया में कथा का आयोजन करने की घोषणा की है। माना जाना चाहिए अगले चुनाव तक बागेश्वर के पीठाधीश्वर का बिहार में आना -जाना लगा रहेगा। राजद के तीखे विरोध के पीछे चुनावी भविष्य की चिंता से इंकार नहीं किया जा सकता। महागठबंधन हिंदुत्व के इस नए पोस्टर ब्वॉय से कैसे निपटती है यह देखना दिलचस्प होगा।