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शहीद संजय चौधरी के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता : वक्ता

-शहीद संजय चौधरी के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता : वक्ता

जनकपुरधाम/मिश्री लाल मधुकर। मधेश अधिकार के लिए प्राणों की आहुति देने वाले शहीद संजय चौधरी के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। मधेश के प्रथम और द्वितीय आंदोलनों में सैकड़ों लोगों ने शहादत दी। इन आंदोलनों का मुख्य उद्देश्य मधेशियों को कार्यपालिका, न्यायपालिका, व्यवस्थापिका और सेना सहित राज्य के सभी अंगों में समान अधिकार दिलाना था। यह बातें ‘मधेश अब की राह’ संवाद श्रृंखला के तहत शहीद संजय चौधरी प्रतिष्ठान नेपाल की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहीं।

वक्ताओं ने कहा कि मधेश के द्वितीय आंदोलन के दौरान शहीद संजय चौधरी पुलिस की गोली के शिकार हुए थे। मधेश अधिकार आंदोलन की शुरुआत स्वर्गीय गजेंद्र नारायण सिंह सहित कई नेताओं के प्रयासों से हुई थी। सिंह दरबार को अधिकार के लिए घेराव के दौरान पुलिस कार्रवाई में वे गंभीर रूप से घायल हुए थे। राम जन्म तिवारी, रामचंद्र मिश्र और अवध किशोर प्रसाद जैसे मधेशवादी नेताओं ने भी आंदोलन को आगे बढ़ाया। बाद में राजेंद्र महतो और हृदयेश त्रिपाठी सहित कई नेता मधेश आंदोलन का हिस्सा बने।

वक्ताओं ने कहा कि सत्ता की राजनीति के कारण मधेशियों के अधिकार का मुद्दा धीरे-धीरे कमजोर पड़ता गया। उपेंद्र यादव ने प्रथम मधेश आंदोलन का नेतृत्व किया था, लेकिन अंतिम चरण में तत्कालीन प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला के आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया। इसे आम मधेशी एक बड़ी राजनीतिक भूल के रूप में देखते हैं।

उन्होंने कहा कि मधेश आंदोलन के संघर्ष का परिणाम यह रहा कि सरकारी नौकरियों में मधेशी कोटा निर्धारित हुआ। गणतंत्र की स्थापना के बाद राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पद पर मधेशी समाज के लोगों को अवसर मिला, जिसे आंदोलन की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि मधेशी समुदाय से बालेन्द्र साह का प्रधानमंत्री बनना भी मधेश आंदोलन और शहीदों के संघर्ष की उपलब्धियों से जुड़ा है।

शहीद संजय चौधरी प्रतिष्ठान नेपाल की अध्यक्ष ममता चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में संविधान सभा सदस्य शैल कुमारी महतो, डॉ. विजय कुमार सिंह, पूर्व मंत्री एवं विधायक, विधायक विंदेश्वर यादव, पूर्व मेयर लाल किशोर साह, हिंदी अभियानी रमन पाण्डेय, संजय सिंह, अनिल महासेठ, दीपक झा, विनीत पांडेय सहित कई लोगों ने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम से पहले मुजेलिया के पास राजमार्ग पर स्थित शहीद द्वार पर शहीद संजय चौधरी सहित मधेश आंदोलन में प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। उपस्थित लोगों ने शहीद द्वार पर माल्यार्पण कर उनके बलिदान को याद किया।