-वही गुरु सफल, जो हमेशा रहे प्रसन्न : दिलीप बेतकेकर
भागलपुर से शशि भूषण मिश्र की रिपोर्ट ।
भारती शिक्षा समिति एवं शिशु शिक्षा प्रबंध समिति के तत्वावधान में सैनिक स्कूल गणपतराय सलारपुरिया सरस्वती विद्या मंदिर नरगाकोठी में चल रहे नवीन आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के 15वें दिन का प्रारंभ विद्या भारती के पूर्व उपाध्यक्ष दिलीप बेतकेकर, विद्या भारती के राष्ट्रीय मंत्री कमल किशोर सिन्हा,प्रदेश सचिव प्रदीप कुमार कुशवाहा,रोहतास के विभाग निरीक्षक उमाशंकर पोद्दार,वर्ग के प्रधानाचार्य सतीश कुमार सिंह ,B.Ed कॉलेज के प्रभारी प्राध्यापक राजकुमार ठाकुर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। सत्र प्रारंभ के पूर्व प्रदेश सचिव प्रदीप कुमार कुशवाहा के जन्मदिन के उपलक्ष्य पर तीन आम के पौधे विद्यालय परिसर में दिलीप बेतकेकर, कमल किशोर सिन्हा एवं प्रदीप कुमार कुशवाहा के द्वारा लगाया गया। ऐसा कर उन्होंने प्रशिक्षणार्थी को यह संदेश देने का प्रयास किया है सभी मानव अपने जिन जन्मदिन पर एक पौधा अवश्य लगावें अपने घर में दीपक जलाएं मिठाई खाएं किंतु पाश्चात्य सभ्यता का जन्मदिन न मनाए अर्थात केक काटकर मोमबत्ती जलाकर जन्मदिन नहीं मनाए।
दिलीप बेतकेकर ने कहा कि एक योग्य शिक्षक स्वयं की खोज द्वारा पाठ्यक्रम को रोचक एवं बोधगम्य बनाते हैं। शिक्षक नवाचार द्वारा ऐसी प्रभावपूर्ण अधिगम स्थिति का निर्माण व प्रयोग करते हैं जिसमें करके सीखने एवं अभ्यास द्वारा सीखने और प्रत्यक्ष अनुभवों को ग्रहण करने का अवसर प्रदान करते हैं। कक्षा में पहले बच्चों तक पहुंचना है फिर शिक्षा देना है। वही गुरु सफल होता है जो हमेशा प्रसन्न मुद्रा में रहता है। गुरु का स्थान गूगल कभी नहीं ले सकता है। गूगल इनफॉरमेशन देता है किंतु गुरु इंस्पिरेशन देता है। गूगल शिक्षक का असिस्टेंट सहायक है। गूगल मैटर देता है किंतु गुरु जी मोटिवेशन देते हैं। गुरु जी का स्थान गूगल या टेक्नोलॉजी नहीं ले सकता है। गुरुजी शाबासी, स्नेह और प्रेम पूर्वक छात्रों को शिक्षा देता है जो गूगल या टेक्नोलॉजी नहीं कर सकता है।

कमल किशोर सिन्हा ने कहा कि विद्यालय सामाजिक चेतना का केंद्र है। हम सिर्फ शिक्षक ही नहीं विद्या भारती के कार्यकर्ता भी हैं जिससे हमारा दायित्व बढ़ जाता है। हमारा कर्तव्य हो जाता है कि हमें समाज की बुराइयों को दूर करना है। हम जब भी ब्लैक बोर्ड का उपयोग करें तो यह ध्यान रखना चाहिए की लिखावट इस प्रकार हो जो आगे से पीछे तक सभी भैया/ बहनों को स्पष्ट दिखाई पड़े। अपने लिखावट का प्रत्येक शब्द पठनीय हो। सुंदर लेखन कौशल का उपयोग हो। शिक्षण एक कौशल है जो अनुभव से सीखा जाता है। श्यामपट्ट का उपयोग भैया /बहनों द्वारा कराने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है।
इस अवसर पर उमाशंकर पोद्दार, राकेश नारायण अम्बष्ट,ब्रह्मदेव प्रसाद,रमेश मणि पाठक,राजेश कुमार ,परमेश्वर कुमार, वीरेंद्र कुमार, गंगा चौधरी ,संजीव पाठक, शशि भूषण मिश्र, आलोक कुमार, सुजीत कुमार गुप्ता, चंद्रशेखर कुमार, साकेत कुमार ,सत्येंद्र कुमार एवं प्रशिक्षणार्थी उपस्थित थे।












