-मुजफ्फरपुर में टाइफाइड का बढ़ा प्रकोप,
-अस्पतालों में बुखार मरीजों की भीड़
-बच्चे और युवा सबसे अधिक प्रभावित
-दूषित पानी और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ बन रहे संक्रमण की वजह
-डॉक्टरों ने साफ-सफाई और सतर्कता बरतने की दी सलाह
मुजफ्फरपुर। जिले में इन दिनों टाइफाइड संक्रमण के मामले बढ़ने की खबरों के बीच सरकारी अस्पतालों में बुखार से पीड़ित मरीजों की भीड़ देखी जा रही है। जिला मुख्यालय स्थित मॉडल अस्पताल से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। मॉडल अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग में सुबह से ही ब्लड टेस्ट और विडाल जांच कराने के लिए मरीजों की लंबी कतार लग रही है। तेज बुखार, बदन दर्द और कमजोरी की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में लोग ओपीडी पहुंच रहे हैं।
अस्पताल में पहुंच रहे मरीजों में बच्चे और युवा भी शामिल हैं। चिकित्सकों के अनुसार बदलते मौसम, दूषित पेयजल, जलजमाव और खान-पान में साफ-सफाई की कमी संक्रमण का प्रमुख कारण हो सकती है। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, चाट-गोलगप्पे, कटे फल और अशुद्ध बर्फ से बने पेय पदार्थों के सेवन से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

टाइफाइड के प्रमुख लक्षणों में लगातार बुखार, सिरदर्द, भूख में कमी, पेट दर्द और शारीरिक कमजोरी शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सरकारी अस्पतालों, अनुमंडलीय अस्पतालों और स्वास्थ्य उपकेंद्रों को आवश्यक दवाइयां एवं जांच किट उपलब्ध रखने के निर्देश दिए जाने की जानकारी दी गई है।
चिकित्सक डॉ. सीके दास के अनुसार टाइफाइड साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है, जो मुख्य रूप से दूषित पानी और भोजन के सेवन से फैलता है। इससे बचाव के लिए लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पानी पीना चाहिए। पानी को अच्छी तरह उबालकर या प्रमाणित फिल्टर से साफ कर इस्तेमाल करना चाहिए। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों, कटे फलों और बासी भोजन से परहेज करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि खाना खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोने की आदत डालनी चाहिए। लगातार बुखार रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लेकर जरूरी जांच करानी चाहिए। चिकित्सकीय सलाह के बिना एंटीबायोटिक का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
टाइफाइड की पुष्टि के लिए केवल विडाल जांच पर निर्भर रहना उचित नहीं है। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार जरूरी जांच करानी चाहिए। समय पर सही जांच और उपचार से संक्रमण की जटिलताओं से बचा जा सकता है।












