-मासिक कवि गोष्ठी में कवियों ने बांधा समां, गीत-ग़ज़लों और हास्य रचनाओं से गूंजा सभागार
मुजफ्फरपुर। अयोध्या प्रसाद खत्री साहित्यिक सेवा संस्थान के तत्वावधान में रविवार को श्री गांधी पुस्तकालय, गोला रोड, मुजफ्फरपुर के सभागार में मासिक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के प्रतिष्ठित कवियों और साहित्यप्रेमियों ने भाग लिया।
कवि गोष्ठी की अध्यक्षता भोजपुरी के वरिष्ठ कवि सतेन्द्र कुमार सत्येन ने की, जबकि संचालन युवा कवि उमेश राज ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ कवि अरुण कुमार तुलसी की रचना “अतीत के मर्म स्थल से वर्तमान के पटल पर…” से हुआ।
अध्यक्ष सतेन्द्र कुमार सत्येन ने अपनी भोजपुरी रचना “हम त जाइब हो बलमुआ बाबा धाम…” प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। कवि ओम प्रकाश गुप्ता ने “बीता हुआ वक्त जब ठहर जाता है, दिल में गहरा जख्म उभर जाता है” रचना के माध्यम से जीवन के भावों को अभिव्यक्त किया।

हास्य कवि डॉ. जगदीश शर्मा “दवा दारू वाले” ने अपनी हास्य रचना “ताप से तन बदन तप रहा है…” सुनाकर श्रोताओं को हंसी से लोटपोट कर दिया। कार्यक्रम का संचालन कर रहे कवि उमेश राज ने “सांसों में मेरी तुम आती जाती रहो…” रचना प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
कवि राम वृक्ष राम चकपुरी की रचना “पूछेगा जरूर देश का बंदा दौड़ा-दौड़ाकर…”, वरिष्ठ कवि अंजनी कुमार पाठक की रचना “जिंदगी का ना कोई ठिकाना, आज यहां कल कहां है जाना…”, मुकेश पासवान की रचना “इस आस से जीते हैं हम, कि आएगी कभी हमारी भी बारी” तथा कवि अशोक भारती की रचना “चौदहवीं के चांद ढलना भी क्या ढलना, रात मिलन की हो तो कुछ बात बने” ने भी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और खूब तालियां बटोरीं।
कार्यक्रम में नागरिक मोर्चा के महासचिव मोहन सिन्हा, अजय कुमार, परशुराम ब्याहुत, पप्पू जी सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी और श्रोता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में श्री गांधी पुस्तकालय ट्रस्ट के ट्रस्टी सह संयुक्त सचिव मुकेश पासवान ने उपस्थित कवियों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। तत्पश्चात अध्यक्ष की अनुमति से आगामी आयोजन तक कार्यक्रम स्थगित करने की घोषणा की गई।












