-भाकपा माले के लोकप्रिय नेता कामरेड विश्वेश्वर प्रसाद यादव का निधन — संगठन में शोक की लहर
राजापाकर – संजय श्रीवास्तव।
भाकपा माले के वरिष्ठ नेता एवं वैशाली जिला सचिव कामरेड विश्वेश्वर प्रसाद यादव का बुधवार की सुबह निधन हो गया। वे पिछले दो दिनों से बुखार से पीड़ित थे। मंगलवार शाम को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से भाकपा माले संगठन और किसान संगठनों में शोक की लहर दौड़ गई है।
कामरेड विश्वेश्वर प्रसाद यादव का जन्म 1 जनवरी 1952 को वैशाली जिले के बिदुपुर प्रखंड के रंदाहा गांव में हुआ था। उनके पिता जंग बहादुर सिंह एक संपन्न किसान थे और “भारत डेयरी” के नाम से दूध कारोबार के लिए जाने जाते थे। विशेश्वर यादव ने इंटर तक शिक्षा प्राप्त की और 1977 में भाकपा माले से जुड़कर गरीबों, दलितों और किसानों के हक की लड़ाई में कूद पड़े।
उन्होंने वैशाली जिले में सामंती उत्पीड़न और शोषण के खिलाफ कई ऐतिहासिक आंदोलनों का नेतृत्व किया। पार्टी संगठन में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें सिवान, दरभंगा और पटना ग्रामीण जिला सचिव के रूप में जिम्मेदारी दी गई। वर्तमान में वे वैशाली जिला सचिव के पद पर कार्यरत थे।
2004 में वे बिहार प्रदेश किसान सभा के वैशाली जिला सचिव बने और 2014 में अखिल भारतीय किसान महासभा के राज्य अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। किसानों के अधिकार, सूदखोरी के खिलाफ संघर्ष और महिला उत्पीड़न व दलित अत्याचार के मामलों में उन्होंने हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में वे पिपरा विधानसभा के प्रभारी थे और चुनाव कार्य में लगातार सक्रिय थे। बीमारी के बावजूद उन्होंने मतदान तक अभियान जारी रखा। मतदान के बाद उनकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई और आज सुबह उनका निधन हो गया।
भाकपा माले की ओर से बताया गया है कि पिपरा से उनका पार्थिव शरीर रंदाहा गांव लाया जा रहा है। वहां अंतिम दर्शन के लिए उनके घर पर रखा जाएगा।
कल सुबह 9 बजे कोनहारा घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल समेत कई वरिष्ठ नेता अंतिम यात्रा में शामिल होंगे।
कामरेड विश्वेश्वर यादव के निधन की खबर मिलते ही वैशाली, समस्तीपुर, पटना और आसपास जिलों से कार्यकर्ता बड़ी संख्या में रंदाहा गांव पहुंचने लगे हैं।












