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जमुई: जलखारिया गांव में नहीं पहुंच पाता है एंबुलेंस,खटिया पर लादकर अस्पताल पहुंचाए जाते हैं मरीज

जमुई: जलखारिया गांव में नहीं पहुंच पाता है एंबुलेंस,खटिया पर लादकर अस्पताल पहुंचाए जाते हैं मरीज

संवाददाता। जमुई।

जमुई जिले के चकाई प्रखंड के जलखारिया गांव में आज तक विकास नहीं पहुंचा है। गांव वालों को बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर जीना पड़ता है। बीमार होने पर मरीजों को खटिया पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ता है।
जलखारिया गांव, जमुई जिले के चकाई प्रखंड के पेटरपहाड़ी पंचायत में स्थित है। यह गांव आज भी विकास से वंचित है। यहां के लोगों को मूलभूत सुविधाएं भी नसीब नहीं हैं। उनका जीवन कठिनाइयों और संघर्षों से भरा है। किसी भी आपात स्थिति में उन्हें अपनी जान हथेली पर लेकर कदम उठाना पड़ता है। स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति इतनी दयनीय है कि अगर कोई बीमार पड़ जाए तो उसे खटिया पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ता है।
गांव वालों का जीवन कठिनाइयों से भरा है। उन्हें हर दिन कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। गांव की हालत इतनी खराब है कि यह देखकर कोई भी हैरान रह जाएगा। सबसे बड़ी समस्या पक्की सड़क का अभाव है। लोगों को साल भर कच्चे रास्ते से आना-जाना पड़ता है।

बारिश के मौसम में यह रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है। गांव पहुंचने के लिए एक नदी भी पार करनी पड़ती है जो बारिश में उफान पर होती है। लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इस नदी को पार करते हैं। लगभग छह महीने तक गांव वालों को भगवान भरोसे ही रहना पड़ता है।
गांव में एम्बुलेंस तो दूर छोटी गाड़ी भी ठीक से नहीं पहुंच पाती है। ऐसे में अगर कोई अचानक बीमार हो जाए तो उसे खटिया पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ता है। हाल ही में ऐसा ही एक मामला सामने आया जब गांव के 50 वर्षीय अनिल कुमार दास जंगल में बेहोश हो गए। ग्रामीणों ने उन्हें खटिया पर लादकर अस्पताल पहुंचाया लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
अगर अनिल कुमार दास को समय पर इलाज मिल जाता तो शायद उनकी जान बच सकती थी। यह घटना गांव में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को उजागर करती है। गांव वालों को उम्मीद है कि सरकार उनकी समस्याओं पर ध्यान देगी और जल्द ही उनके गांव में विकास की किरण पहुंचेगी।