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कांटी में बुद्ध पूर्णिमा पर गूंजा ‘कुशी ही महापरिनिर्वाण स्थल’ का दावा, बौद्ध सर्किट से जोड़ने की मांग

-कांटी में बुद्ध पूर्णिमा पर गूंजा ‘कुशी ही महापरिनिर्वाण स्थल’ का दावा, बौद्ध सर्किट से जोड़ने की मांग

मुजफ्फरपुर/कांटी।

बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर कांटी प्रखंड के कुशी स्थित बुद्ध भूमि पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें भगवान बुद्ध के विचारों को अपनाकर वैश्विक और आत्मिक शांति स्थापित करने की अपील की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कांटी विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष पिनाकी झा ने की।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने गौतम बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल को लेकर चल रही बहस पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि बुद्ध का जन्मस्थल और ज्ञान प्राप्ति स्थल तो प्रमाणित हैं, लेकिन महापरिनिर्वाण स्थल को लेकर अब भी मतभेद बना हुआ है।

साहित्यकार चंद्रभूषण सिंह ‘चंद्र’ ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश का कासिया नहीं, बल्कि मुजफ्फरपुर जिले का कांटी स्थित कुशी ही भगवान बुद्ध का वास्तविक महापरिनिर्वाण स्थल है। उन्होंने सरकार और जनप्रतिनिधियों से इस मुद्दे को सदन में उठाकर कांटी कुशी को बौद्ध सर्किट से जोड़ने की मांग की।

वक्ताओं ने विभिन्न ऐतिहासिक तथ्यों और पुस्तकों का हवाला देते हुए कहा कि वैशाली से बुद्ध की अंतिम यात्रा के दौरान वर्णित स्थानों—पावा (वर्तमान पानापुर), भंडाग्राम (भटौना), हस्तिग्राम (हरचंदा) और भोगनगर (भोजा विशुनपुर)—के नाम आज भी इस क्षेत्र में मिलते हैं, जो इस दावे को मजबूत करते हैं।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि ‘रीमेंस नियर कसिया’ पुस्तक के लेखक पुरातत्वविद वी.ए. स्मिथ ने भी कासिया को महापरिनिर्वाण स्थल मानने पर संदेह जताया था। वक्ताओं ने इस विषय पर गहन शोध की आवश्यकता पर बल दिया ताकि ऐतिहासिक सत्य सामने आ सके।

इस दौरान उपस्थित लोगों ने भगवान बुद्ध की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में पत्रकार रजनीश कुमार, हरिओम झा, ओमप्रकाश झा, परशुराम सिंह, स्वराजलाल ठाकुर, चंद्रकिशोर चौबे, हर्षवर्धन ठाकुर, नंदकिशोर ठाकुर, सोनू कुमार सिंह सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।