-उत्तर बिहार में 31 अक्टूबर तक आंधी-बारिश के आसार, किसानों को सतर्क रहने की सलाह
पूसा/समस्तीपुर। उत्तर बिहार के कई जिलों में 31 अक्टूबर तक चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से तेज हवा, गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। मधुबनी और सीतामढ़ी में अपेक्षाकृत अच्छी बारिश का अनुमान है। इसके बाद मौसम के साफ और शुष्क रहने की संभावना जताई गई है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा एवं जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र ने 31 अक्टूबर से 4 नवंबर 2026 तक का मौसम पूर्वानुमान जारी किया है।
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, इस अवधि में अधिकतम तापमान 22 से 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 से 21 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता 80 से 95 प्रतिशत तथा दोपहर में 55 से 65 प्रतिशत रहने का अनुमान है। शुरुआत में पछुआ और बाद में पुरवा हवा चलने की संभावना है। गरज-चमक वाले दिनों में हवा की गति 15 से 25 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है। इसके बाद हवा की गति घटकर 5 से 10 किलोमीटर प्रति घंटा रहने का अनुमान है।

रबी फसलों की बुआई में बरतें सावधानी:
पिछले तीन दिनों में पूसा में औसत अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री और न्यूनतम तापमान 18.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस दौरान 26 मिलीमीटर बारिश हुई। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि जिन खेतों में अधिक बारिश हुई है, वहां अतिरिक्त पानी की निकासी सुनिश्चित करें। मिट्टी में अनुकूल नमी होने पर ही रबी फसलों की बुआई करें। भंडारित धान और खरीफ मक्का में नमी एवं कीटों के प्रकोप पर भी नजर रखें।
चना, मटर और सब्जियों की बुआई पर जोर:
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को चने की बुआई शुरू करने की सलाह दी है। देसी चने के लिए पूसा-256, केपीजी-59, केडब्ल्यूआर-108, पंत जी-189 और पूसा-372 प्रमुख अनुशंसित किस्में हैं। वहीं, काबुली चने के लिए एचके-2 और एचके-5-169 किस्मों की सिफारिश की गई है। देसी चने के लिए 75 से 80 किलोग्राम तथा काबुली चने के लिए 100 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की दर निर्धारित की गई है। बुआई से पहले बीजोपचार और राइजोबियम कल्चर का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
मटर की मध्यम एवं पछेती किस्मों की बुआई नवंबर के मध्य तक पूरी कर लेने को कहा गया है। इनमें काशी शक्ति, बोनविल, पंत उपहार, जवाहर मटर-1 और जवाहर मटर-2 शामिल हैं। इसके अलावा किसानों को पालक, गाजर और पत्तागोभी की बुआई समय पर पूरी करने की सलाह दी गई है। पालक के लिए पूसा ज्योति, ऑल ग्रीन और पूसा हरित, जबकि गाजर के लिए पूसा जमुनी, पूसा रुधिरा और अर्का सूरज जैसी किस्में अनुशंसित हैं।
पत्तागोभी की बुआई भी पूरी करने का सुझाव दिया गया है। इसके लिए पूसा ड्रम हेड और पूसा अगेती किस्मों की सिफारिश की गई है। कृषि वैज्ञानिकों ने बेहतर उत्पादन के लिए खेत की तैयारी, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, समय पर निराई-गुड़ाई और कीटों की नियमित निगरानी पर विशेष ध्यान देने की अपील की है।












