-आनंद मोहन का बड़ा बयान, कहा- मुसलमान नहीं, असली निशाने पर राजपूत समाज
मुजफ्फरपुर। पूर्व सांसद एवं फ्रेंड्स ऑफ आनंद के संरक्षक आनंद मोहन ने रविवार को मुजफ्फरपुर में राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर कई बड़े बयान देकर बिहार की सियासत में हलचल पैदा कर दी। सीतामढ़ी में प्रस्तावित महाराणा प्रताप प्रतिमा अनावरण समारोह की तैयारियों को लेकर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि देश में इस समय मुसलमानों को सॉफ्ट टारगेट बनाया जा रहा है, जबकि असली निशाने पर राजपूत समाज है।
आनंद मोहन ने बिहार की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए दावा किया कि “25 से 30 फिर से नीतीश” के नारे के साथ सरकार बनी थी, लेकिन बाद में गन पॉइंट पर मुख्यमंत्री से इस्तीफा लिया गया। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम पर समय आने पर और भी बातें सामने आएंगी।
धार्मिक और सामाजिक संबंधों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि जैन, बौद्ध और सिख समुदायों से क्षत्रिय समाज का कभी कोई संघर्ष नहीं हो सकता। उन्होंने तर्क दिया कि जैन धर्म के सभी तीर्थंकर, भगवान बुद्ध तथा सिखों के सभी दस गुरु क्षत्रिय परंपरा से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने इतिहास में साथ दिया, उनसे संघर्ष का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।
अपने पुत्र एवं विधायक चेतन आनंद के राष्ट्रीय जनता दल छोड़कर जदयू में शामिल होने के फैसले का बचाव करते हुए आनंद मोहन ने कहा कि राजद में रहते हुए उनके बेटे और राजपूत समाज को लगातार अपमानित किया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि “ठाकुर का कुआं” जैसी कविताओं और बयानों के माध्यम से समाज को निशाना बनाया गया, जिसके कारण चेतन आनंद ने अलग राह चुनी।

उन्होंने कहा, “राजपूत गद्दार या विश्वासघाती नहीं होता, राजपूत बागी होता है।” साथ ही देश में आंतरिक लोकतंत्र के कमजोर होने पर चिंता जताते हुए कहा कि एक समय “इंदिरा इज इंडिया, इंडिया इज इंदिरा” का दौर था और आज फिर व्यक्तिवाद की राजनीति हावी होती दिख रही है।
खुद को बाहुबली कहे जाने के सवाल पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि लोगों ने लगातार उन्हें बाहुबली कह-कहकर ही बाहुबली बना दिया है।
आनंद मोहन ने समर्थकों के बीच बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा कि आगामी चुनाव से पहले राजपूत समाज से एक उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा और चुनाव के बाद समाज के लोगों को मंत्रिमंडल में भी उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। उन्होंने कहा कि राजपूत समाज की राजनीतिक भागीदारी और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए प्रयास जारी हैं।
कार्यक्रम में सीतामढ़ी में होने वाले महाराणा प्रताप प्रतिमा अनावरण समारोह की तैयारियों और कार्यक्रम की रूपरेखा पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बड़ी संख्या में उपस्थित समर्थकों ने कार्यक्रम को सफल बनाने का संकल्प लिया।











