Advertisement

बस में गोलीबारी मामले में दोषसिद्ध व्यक्ति बरी, हाईकोर्ट ने कहा- सामूहिक आपराधिक मंशा व्यक्तिगत भागीदारी का विकल्प नहीं

-बस में गोलीबारी मामले में दोषसिद्ध व्यक्ति बरी, हाईकोर्ट ने कहा- सामूहिक आपराधिक मंशा व्यक्तिगत भागीदारी का विकल्प नहीं

पटना। पटना हाईकोर्ट ने बस में गोलीबारी के एक मामले में दोषसिद्ध रंजीत महतो को बरी कर दिया है। जस्टिस संजय कुमार सिंह एवं जस्टिस अंसुल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए दोषसिद्धि और सजा को निरस्त कर दिया। घटना में गोलीबारी के दौरान दो लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए थे।

मामला मुख्य रूप से सूचक अरुणा देवी के बयान पर आधारित था। उन्होंने खुद को घटना की प्रत्यक्षदर्शी बताते हुए गोली चलाने वालों में अभियुक्त की पहचान की थी। हालांकि, कोर्ट ने बस में उनकी मौजूदगी और हमलावरों को पहचानने के अवसर से जुड़े उनके बयान में महत्वपूर्ण असंगतियां पाईं। घटना में घायल दो प्रत्यक्षदर्शियों ने भी अभियुक्त की पहचान नहीं की। इनमें से एक गवाह ने स्पष्ट रूप से कहा कि गोली चलाने वाले व्यक्ति कोर्ट में अभियुक्त के रूप में मौजूद व्यक्ति नहीं थे। स्वतंत्र गवाहों से भी अभियोजन के मामले को आवश्यक पुष्टि नहीं मिल सकी।

हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 34 के इस्तेमाल पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि सामूहिक आपराधिक मंशा व्यक्तिगत भागीदारी के प्रमाण का विकल्प नहीं हो सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 34 का उपयोग साक्ष्य में मौजूद कमी को पूरा करने के लिए नहीं किया जा सकता। इसे लागू करने से पहले अभियोजन को विश्वसनीय साक्ष्य के माध्यम से यह स्थापित करना आवश्यक है कि संबंधित अभियुक्त ने स्वयं आपराधिक कृत्य में भाग लिया था।

कोर्ट ने मामले की विवेचना में रही कमियों पर भी गौर किया। हत्या में इस्तेमाल हथियार बरामद नहीं हुआ था। इसके अलावा कोई टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड नहीं कराई गई और पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक के समक्ष मृतकों में से एक की पहचान भी स्थापित नहीं की गई थी। कोर्ट ने कहा कि केवल विवेचना में कमी होना हमेशा बरी किए जाने का आधार नहीं होता, लेकिन जब जांच अभियोजन के मामले को जोड़ने वाली आवश्यक कड़ियों को स्थापित करने में विफल रहती है, तो ऐसी कमी महत्वपूर्ण हो जाती है।

सभी साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि मुख्य प्रत्यक्षदर्शी का बयान स्वतंत्र पुष्टि के अभाव में दोषसिद्धि का सुरक्षित आधार नहीं बन सकता। इसके बाद खंडपीठ ने रंजीत महतो की दोषसिद्धि और सजा को निरस्त करते हुए उसे बरी कर दिया।