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एमजीसीयू में विश्व गर्भनिरोधक दिवस पर क्विज और व्याख्यान, 25 विद्यार्थियों ने लिया भाग

-एमजीसीयू में विश्व गर्भनिरोधक दिवस पर क्विज और व्याख्यान, 25 विद्यार्थियों ने लिया भाग

मोतिहारी, राजन द्विवेदी। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (एमजीसीयू) के सेहत केंद्र की ओर से विश्व गर्भनिरोधक दिवस के अवसर पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता एवं विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के 25 विद्यार्थियों ने भाग लिया।

विशिष्ट वक्ता के रूप में विश्वविद्यालय की छात्र परामर्शदाता शशि प्रभा ने विश्व गर्भनिरोधक दिवस के उद्देश्य, इससे जुड़ी गतिविधियों और वर्तमान समय में इसकी जरूरतों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने वर्ष 2026 की थीम “कोई बाधा नहीं, बस विकल्प: गर्भनिरोधक तक पहुंच अब है” को विद्यार्थियों के समक्ष स्पष्ट किया।

उन्होंने कहा कि गर्भनिरोधक के संबंध में सही और प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध होने से असुरक्षित गर्भपात तथा उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने केजीएमयू लखनऊ की 2025-26 की एक स्टडी का हवाला देते हुए बताया कि 100 प्रतिशत युवतियों ने गर्भनिरोधक के बारे में सुना है, लेकिन 75 प्रतिशत के मन में इसके संभावित साइड इफेक्ट और फर्टिलिटी पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल हैं।

शशि प्रभा ने कहा कि 2026 में युवाओं के लिए सही जानकारी तक पहुंच भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है। उनके अनुसार, 72 प्रतिशत युवा जानकारी के लिए इंस्टाग्राम, रील्स और चैटजीपीटी जैसे डिजिटल माध्यमों पर निर्भर हैं, जबकि 58 प्रतिशत को वहां भ्रामक जानकारी मिलने की बात सामने आई है। वहीं, 59 प्रतिशत युवतियां प्राइवेसी और झिझक के कारण मेडिकल स्टोर से गर्भनिरोधक खरीदने में संकोच करती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए प्रमाणिक जानकारी के महत्व पर जोर दिया।

कार्यक्रम में सेहत केंद्र के समन्वयक डॉ. बबलू पाल, सह-समन्वयक डॉ. गोविंद प्रसाद वर्मा, संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य डॉ. विश्वजीत बर्मन सहित अन्य लोग मौजूद रहे।