-आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में कर्मचारियों का जोरदार प्रदर्शन, पवन कुमार सिन्हा के खिलाफ नारेबाजी और पुतला दहन
पटना, 14 सितंबर 2026। आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में जांच समिति की प्रक्रिया और कथित अमर्यादित व्यवहार को लेकर कर्मचारियों का आक्रोश सोमवार को सड़क पर उतर आया। कर्मचारियों ने जांच समिति के समन्वयक पवन कुमार सिन्हा के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए उनका पुतला दहन किया। इस दौरान परिसर में “पवन कुमार सिन्हा इस्तीफा दो” और “विश्वविद्यालय की गरिमा से खिलवाड़ बंद करो” के नारे लगाए गए।
कर्मचारियों का आरोप है कि राज्यपाल सचिवालय, बिहार द्वारा विश्वविद्यालय के संबंध में गठित जांच समिति की प्रक्रिया और उसके अधिकार क्षेत्र को लेकर कई सवाल हैं। कर्मचारियों के अनुसार, 27 जुलाई 2026 के पत्र के माध्यम से जांच समिति का गठन किया गया था, जिसमें उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव पवन कुमार सिन्हा को समन्वयक बनाया गया था।
कर्मचारियों ने सवाल उठाया कि संबंधित पत्र में जांच के लिए 15 दिनों की अवधि निर्धारित किए जाने के बावजूद 12 सितंबर को समिति विश्वविद्यालय परिसर में जांच के लिए किस आधार पर पहुंची। उनका कहना है कि जांच की अवधि बढ़ाए जाने से संबंधित कोई आधिकारिक पत्र विश्वविद्यालय को प्राप्त नहीं हुआ था।

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि 12 सितंबर को जांच के दौरान पवन कुमार सिन्हा ने कुलपति और विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों के साथ कथित रूप से अभद्र एवं अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया तथा धमकीपूर्ण लहजे में बातचीत की। प्रेस विज्ञप्ति में एक कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कर्मचारियों का आरोप है कि निर्धारित जांच विषय से अलग विभिन्न फाइलों और दस्तावेजों की मांग कर विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों पर दबाव बनाया गया। विश्वविद्यालय के अनुसार, जांच से संबंधित 1,344 पृष्ठों के अनुलग्नक उपलब्ध कराए जाने के बावजूद अतिरिक्त फाइलों की मांग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने कहा कि विश्वविद्यालय की गरिमा और स्वायत्तता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने पवन कुमार सिन्हा से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की। साथ ही जांच समिति की वैधानिकता और अधिकार क्षेत्र की समीक्षा कराने की मांग उठाई।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कुलाधिपति-सह-राज्यपाल, बिहार से पूरे मामले का संज्ञान लेकर जांच समिति के गठन, अधिकार क्षेत्र और कथित अमर्यादित आचरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।












