-09 से 13 सितंबर तक बिहार में हल्की से मध्यम बारिश के आसार, किसानों के लिए कृषि सलाह जारी
पूसा, समस्तीपुर। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा एवं कृषि मौसम विभाग ने 8 सितंबर 2026 को मौसम बुलेटिन संख्या-69 जारी किया है। बुलेटिन के अनुसार आगामी 9 से 13 सितंबर के बीच बिहार के कई हिस्सों में हल्के से मध्यम बादल छाए रहने तथा कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 9 से 13 सितंबर के दौरान बेगूसराय, सीवान, सारण, गोपालगंज तथा पूर्वी और पश्चिमी चंपारण के एक-दो स्थानों पर गरज के साथ बिजली चमकने की संभावना है। वहीं 9 से 11 सितंबर के बीच सारण, सीवान और गोपालगंज में कुछ स्थानों पर मध्यम बारिश हो सकती है।
इस दौरान राज्य में अधिकतम तापमान 30 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता 85 से 95 प्रतिशत और दोपहर में 55 से 60 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। पूर्वानुमान अवधि में मुख्य रूप से पूर्वी दिशा से 8 से 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। 14 सितंबर से पछिया हवा चलने का भी अनुमान जताया गया है।
इससे पहले पूसा मौसम वेधशाला के अनुसार पिछले तीन दिनों में औसत अधिकतम तापमान 32.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 24.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह औसत सापेक्ष आर्द्रता 94 प्रतिशत और दोपहर में 80 प्रतिशत रही। इस अवधि में औसत हवा की गति 4.3 किलोमीटर प्रति घंटा तथा दैनिक वाष्पीकरण 3.3 मिलीमीटर दर्ज किया गया। इस दौरान 4.5 मिलीमीटर बारिश भी रिकॉर्ड की गई।

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को धान की फसल में पत्ती लपेटक और भूरा माहू की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है। प्रकोप बढ़ने पर अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करने को कहा गया है। देर से बोई गई धान की फसल में खैरा रोग की निगरानी तथा लक्षण दिखाई देने पर जिंक सल्फेट और चूने के घोल का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। वहीं धान में दाना बनने और दूधिया अवस्था के दौरान गांधी बग की निगरानी करने को कहा गया है।
मक्के की फसल में फॉल आर्मीवर्म की नियमित निगरानी करने तथा आवश्यकता पड़ने पर अनुशंसित दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। फूलगोभी की मध्य अवधि में तैयार होने वाली किस्मों की बुआई करने का समय भी किसानों के लिए उपयुक्त बताया गया है। इसके लिए पूसा हिम ज्योति, डी-96 और पंत शुभ्रा जैसी किस्मों का चयन किया जा सकता है।
कृषि वैज्ञानिकों ने पत्तागोभी की बुआई शुरू करने की भी सलाह दी है। उत्तर बिहार के लिए पूसा ड्रम हेड और पूसा अगैती किस्मों को उपयुक्त बताया गया है। इसके अलावा शलजम की बुआई करने तथा खेत की तैयारी के दौरान पर्याप्त मात्रा में सड़ी हुई गोबर की खाद के साथ संतुलित उर्वरक का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
बरसात के मौसम में लौकी, तोरई, करेला, खीरा और झींगा जैसी सब्जियों में फल मक्खी की नियमित निगरानी करने को कहा गया है। संक्रमित फलों को तोड़कर मिट्टी में गहराई से दबाने तथा प्रति एकड़ 4 से 8 फ्लाई ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है। जैविक नियंत्रण के लिए नीम आधारित उत्पादों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
पशुपालकों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। दुधारू पशुओं को संक्रामक रोगों से बचाने के लिए पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार निवारक उपाय अपनाने तथा पशुशाला के आसपास चूने के पानी का छिड़काव करने को कहा गया है, ताकि मक्खी, मच्छर और अन्य कीटों का नियंत्रण किया जा सके।














