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जेब की छोटी लापरवाही पड़ रही भारी, तीन साल में 62.13 अरब नोट हुए खराब; आरबीआई के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

-जेब की छोटी लापरवाही पड़ रही भारी, तीन साल में 62.13 अरब नोट हुए खराब; आरबीआई के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली। जेब में मुड़ा-तुड़ा नोट रखना, उस पर मोबाइल नंबर लिख देना, स्टेपल लगाना, टेप से फटे नोट को जोड़ना या गंदे नोटों का इस्तेमाल करना आम बात बन चुकी है। लेकिन आम लोगों की यही छोटी-छोटी लापरवाहियां देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा बोझ डाल रही हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में 62.13 अरब नोट घिसने, फटने और गंदे होने के कारण चलन से बाहर करने पड़े।
आरबीआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में सबसे अधिक 23.86 अरब नोट खराब होने के कारण वापस लेने पड़े। वहीं 2023-24 में 21.25 अरब और 2025-26 में 17.02 अरब नोट चलन से हटाए गए। ये आंकड़े बताते हैं कि नोटों की देखभाल को लेकर अब भी लोगों में पर्याप्त जागरूकता का अभाव है।
सबसे अधिक नुकसान 500 रुपये के नोटों का हुआ। पिछले तीन वर्षों में 21.30 अरब 500 रुपये के नोट खराब होने के कारण चलन से बाहर किए गए। इसके अलावा 100 रुपये के 17.66 अरब, 50 रुपये के 6.06 अरब, 10 रुपये के 5.47 अरब, 200 रुपये के 5.40 अरब, 20 रुपये के 4.06 अरब और 5 रुपये के करीब 94.96 करोड़ नोट भी खराब होकर अनुपयोगी हो गए। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन नोटों का सबसे अधिक इस्तेमाल होता है, वे सबसे तेजी से खराब भी होते हैं।


आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार नोटों पर लिखना, स्टेपल करना, बार-बार मोड़ना, रबर बैंड से कसकर बांधना या उन्हें गंदा रखना उनकी गुणवत्ता को तेजी से प्रभावित करता है। ऐसे नोटों को अंततः आरबीआई को चलन से बाहर करना पड़ता है और उनकी जगह नए नोटों की छपाई पर हर वर्ष बड़ी राशि खर्च होती है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि लोग कुछ सामान्य सावधानियां अपनाएं—जैसे नोटों पर कुछ न लिखें, स्टेपल का उपयोग न करें, जरूरत से ज्यादा न मोड़ें और उन्हें साफ-सुथरे तरीके से रखें—तो नोटों की उम्र काफी बढ़ सकती है। इससे नए नोट छापने पर होने वाला सरकारी खर्च कम होगा और देश के संसाधनों की भी बचत होगी।
छोटी-सी सावधानी न केवल आपकी जेब में रखे नोट को सुरक्षित रख सकती है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और संसाधनों की बचत में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।