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उत्तर बिहार में 15 से 17 जुलाई तक मेघगर्जन और वज्रपात की चेतावनी, किसानों को धान रोपनी तेज करने की सलाह

-उत्तर बिहार में 15 से 17 जुलाई तक मेघगर्जन और वज्रपात की चेतावनी, किसानों को धान रोपनी तेज करने की सलाह

समस्तीपुर/पूसा। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा स्थित ग्रामीण कृषि मौसम सेवा एवं भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 15 से 19 जुलाई 2026 के लिए मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर बिहार के अधिकांश जिलों में 15 से 17 जुलाई के बीच मेघगर्जन, वज्रपात और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर तेज हवा भी चल सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी और पश्चिम चंपारण जिलों में 15 और 16 जुलाई के आसपास मध्यम से भारी वर्षा होने की संभावना है। इस दौरान आसमान में हल्के से मध्यम बादल छाए रहेंगे तथा वर्षा के समय घने बादल देखने को मिल सकते हैं।
पिछले तीन दिनों के मौसम का आकलन बताते हुए कृषि मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि अधिकतम औसत तापमान 31.6 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 24.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह की सापेक्ष आर्द्रता 94 प्रतिशत और दोपहर में 83 प्रतिशत रही। इस अवधि में 91.4 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।


पूर्वानुमान अवधि के दौरान अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान 29 से 32 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 24 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। हालांकि बेगूसराय, वैशाली, शिवहर और पूर्वी चंपारण में अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। दक्षिण-पश्चिम दिशा से 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की भी संभावना है।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा वाले क्षेत्रों में 21 से 25 दिन की धान की नर्सरी की रोपाई करने की सलाह दी है। साथ ही खेत की अंतिम तैयारी के समय संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और जिंक सल्फेट का प्रयोग करने की अनुशंसा की गई है।
जहां वर्षा की कमी के कारण धान की खेती संभव नहीं है, वहां किसानों को वैकल्पिक फसल के रूप में तिल की खेती अपनाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा उड़द और अरहर की बुआई भी मौसम के अनुकूल बताई गई है। बीजोपचार कर बुआई करने और संतुलित उर्वरकों के उपयोग की सलाह दी गई है।
कृषि मौसम सेवा ने बागवानी करने वाले किसानों को नए बाग और कृषि वानिकी पौधों के रोपण के लिए वर्तमान मौसम को उपयुक्त बताया है। वहीं पशुपालकों को बरसात के मौसम में बकरियों को गीला चारा नहीं खिलाने, नियमित साफ-सफाई रखने, कृमिनाशक दवा देने तथा समय पर टीकाकरण कराने की सलाह दी गई है।