-प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड में नया खुलासा, सरकारी डॉक्टर की भूमिका पर उठे सवाल; निलंबन की तैयारी
मुजफ्फरपुर। सात लोगों की जान लेने वाले चर्चित प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड मामले में अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। हादसे की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई गंभीर तथ्य उजागर हो रहे हैं। अब बंदरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में पदस्थापित एक सरकारी चिकित्सक की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।
जानकारी के अनुसार बंदरा पीएचसी में कार्यरत डॉ. पंकज कुमार पर आरोप है कि वे सरकारी सेवा में रहते हुए निजी प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू का संचालन कर रहे थे। जिस समय अस्पताल के आईसीयू में भीषण आग लगी, उस समय भी आईसीयू की जिम्मेदारी उन्हीं के पास बताई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि हादसे के दौरान वे अपने सरकारी ड्यूटी स्थल पर मौजूद नहीं थे।
गौरतलब है कि गुरुवार की अहले सुबह प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में कथित रूप से शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई थी। इस दर्दनाक हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य प्रभावित हुए थे। घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने मामले की गहन जांच शुरू की थी।
जांच के दौरान डॉ. पंकज कुमार की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर ब्रह्मपुरा थाना पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। हालांकि बाद में अदालत से उन्हें जमानत मिल गई। लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग की ओर से की जा रही विभागीय जांच के बाद उनके खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम बंदरा पीएचसी के उपस्थिति पंजी (अटेंडेंस रजिस्टर) की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि जिस समय उन्हें सरकारी अस्पताल में अपनी सेवाएं देनी थीं, उस दौरान वे निजी अस्पताल में किस आधार पर कार्यरत थे और क्या उन्होंने सेवा नियमों का उल्लंघन किया है।
इस संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी (पूर्वी) तुषार कुमार ने कहा कि मामले की जांच जारी है और सभी तथ्यों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। यदि जांच में सरकारी नियमों के उल्लंघन या ड्यूटी में लापरवाही की पुष्टि होती है, तो संबंधित चिकित्सक के खिलाफ कड़ी विभागीय एवं प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी अस्पताल में तैनात चिकित्सक निजी नर्सिंग होम के आईसीयू का संचालन कैसे कर रहे थे। साथ ही हादसे के समय उनकी अनुपस्थिति को लेकर भी कई प्रश्न खड़े हो रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मामला केवल गिरफ्तारी तक सीमित रहेगा या फिर डॉक्टर पर निलंबन समेत अन्य कठोर कार्रवाई भी की जाएगी।












