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RDS कॉलेज में कर्मचारियों का हंगामा: वेतन कटौती, छंटनी और प्राचार्य पर मनमानी के आरोप

-RDS कॉलेज में कर्मचारियों का हंगामा: वेतन कटौती, छंटनी और प्राचार्य पर मनमानी के आरोप

मुजफ्फरपुर। रामदयालु सिंह महाविद्यालय (RDS कॉलेज) में कॉलेज प्रशासन और दैनिक वेतनभोगी गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। कर्मचारियों ने प्राचार्य पर मनमानी, आर्थिक शोषण और कर्मचारियों की समस्याओं की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कॉलेज में लिए जा रहे फैसलों से कार्य वातावरण प्रभावित हो रहा है और कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है।

कर्मचारियों के अनुसार हाल के दिनों में कुछ दैनिक वेतनभोगी कर्मियों का पदावनत किया गया, कुछ को सेवा से हटा दिया गया तथा परिसर में रहने वाले कुछ चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों से आवास खाली करवाने के साथ आर्थिक दंड भी वसूला गया। इसके अलावा कर्मचारियों के मासिक पारिश्रमिक में 3,000 से 5,000 रुपये तक की कटौती कर दी गई, जबकि कटौती का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया।

कर्मचारियों का दावा है कि विश्वविद्यालय के पत्रांक बी/1222 दिनांक 18 जुलाई 2022 के अनुसार वर्ग-3 कर्मचारियों को 26,069 रुपये तथा वर्ग-4 कर्मचारियों को 20,657 रुपये पारिश्रमिक दिए जाने का प्रावधान है। इसके विपरीत वर्तमान में वर्ग-3 कर्मचारियों को 18,000 रुपये, वर्ग-4 कर्मचारियों को 15,000 रुपये तथा सफाई कर्मियों को मात्र 12,000 रुपये दिए जा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच यह कटौती उनके परिवार के भरण-पोषण पर गंभीर असर डाल रही है।

पीड़ित कर्मचारियों का आरोप है कि वेतन कटौती के संबंध में जब वे प्राचार्य से बातचीत करने पहुंचे तो उन्होंने किसी भी प्रकार की वार्ता से इनकार कर दिया। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी बात सुनने के बजाय प्राचार्य बैठक छोड़कर चले गए, जिससे उनमें और अधिक आक्रोश बढ़ गया।

कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि करीब एक माह पूर्व सात सेवारत कर्मचारियों को अचानक सेवा से हटा दिया गया। इनमें एक ऐसा कर्मचारी भी शामिल था जो पिछले 14 वर्षों से महाविद्यालय में कार्यरत था। कर्मचारियों का आरोप है कि अनुभवी कर्मियों को हटाकर नए लोगों को नियुक्त करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ समय पूर्व एक आउटसोर्सिंग एजेंसी ने अपने कर्मियों की नियुक्ति के बदले कमीशन की पेशकश की थी, हालांकि उस समय इसे स्वीकार नहीं किया गया था।

विवाद के बीच कर्मचारियों ने कॉलेज प्रशासन को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि हटाए गए सात कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति नहीं की गई, वेतन कटौती वापस नहीं ली गई और सम्मानजनक वार्ता शुरू नहीं हुई, तो वे कॉलेज परिसर में आमरण अनशन शुरू करेंगे। कर्मचारियों ने कहा कि आंदोलन के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति या स्वास्थ्य संबंधी नुकसान की जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन और प्राचार्य की होगी।

हालांकि, इस मामले में कॉलेज प्रशासन या प्राचार्य की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कर्मचारियों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।