-नई दिल्ली से सूचना: 3 मार्च को वर्ष का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण, ‘रक्त चंद्र’ का दिखेगा अद्भुत नजारा
नई दिल्ली। वर्ष 2026 की पहली बड़ी खगोलीय घटना 3 मार्च, मंगलवार को देखने को मिलेगी। इस दिन पूर्ण चंद्र ग्रहण घटित होगा, जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की प्रच्छाया यानी छाया में आ जाएगा। इस दौरान चंद्रमा गहरे लाल या तांबे रंग का दिखाई देगा, जिसे आम तौर पर ‘रक्त चंद्र’ कहा जाता है। भारतीय मौसम विभाग ने इस खगोलीय घटना की विस्तृत जानकारी साझा की है।
क्या होता है पूर्ण चंद्र ग्रहण:
खगोल विज्ञान के अनुसार जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया पूरी तरह चंद्रमा को ढक लेती है, तब पूर्ण चंद्र ग्रहण होता है। यदि चंद्रमा का केवल एक हिस्सा छाया में आता है तो उसे आंशिक चंद्र ग्रहण कहा जाता है।
इस बार ग्रहण का परिमाण 1.155 बताया गया है, जिसे गहरा और प्रभावशाली पूर्ण चंद्र ग्रहण माना जा रहा है। पूर्ण चरण के दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देता है, क्योंकि सूर्य की किरणें पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरती हैं और लाल रोशनी चंद्रमा तक पहुंचती है।
कहां-कहां दिखेगा नजारा:
यह चंद्र ग्रहण भारत के अलावा पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के कई हिस्सों में भी दिखाई देगा। भारत में अधिकांश स्थानों पर चंद्रोदय के समय ग्रहण का अंतिम चरण देखा जा सकेगा।
अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और उत्तर-पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में ग्रहण के पूर्ण चरण का अंतिम भाग भी दिखाई देने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह दृश्य विज्ञान प्रेमियों और विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगा।

ग्रहण का समय (भारतीय समयानुसार)
शुरुआत: दोपहर 3:20 बजे
पूर्णता का प्रारंभ: शाम 4:34 बजे
पूर्णता की समाप्ति: शाम 5:33 बजे
समापन: शाम 6:48 बजे
सूर्यास्त और चंद्रोदय के आसपास इसका अंतिम चरण अधिक स्पष्ट दिखाई देगा। लोग खुले आसमान में पश्चिमी दिशा की ओर देखकर इस अद्भुत दृश्य का अनुभव कर सकेंगे।
सुरक्षित है अवलोकन:
विशेषज्ञों के अनुसार चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित है। इसके लिए किसी विशेष चश्मे की आवश्यकता नहीं होती। दूरबीन या टेलीस्कोप से चंद्रमा की सतह के रंग और बनावट को अधिक स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। कई विद्यालयों और महाविद्यालयों में इस अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना है।
होली से पहले धार्मिक महत्व:
होली से ठीक पहले पड़ रहे इस ग्रहण का धार्मिक महत्व भी बढ़ गया है। परंपराओं के अनुसार ग्रहण के दौरान सूतक काल माना जाता है। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रखे जाते हैं और पूजा-पाठ नहीं किया जाता। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान-दान और विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा निभाई जाती है।
पूर्ण चंद्र ग्रहण न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से भी खास माना जाता है। यदि मौसम अनुकूल रहा तो देशभर में लोग इस दुर्लभ और रोमांचक खगोलीय घटना का साक्षी बन सकेंगे। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे बच्चों को भी इस प्राकृतिक घटना के वैज्ञानिक पहलुओं से अवगत कराएं।












