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शिक्षा के मंदिर में शर्मनाक हरकतें: महिला शिक्षकों को अश्लील मैसेज भेजने पर दो शिक्षक निलंबित

-शिक्षा के मंदिर में शर्मनाक हरकतें: महिला शिक्षकों को अश्लील मैसेज भेजने पर दो शिक्षक निलंबित

मुजफ्फरपुर। जिस जगह से संस्कार, तालीम और तहज़ीब की उम्मीद की जाती है, वहीं से शर्मनाक हरकतों की बदबू उठी है। शिक्षा के मंदिर को कुछ तथाकथित गुरुजनों ने अपनी गंदी सोच से दाग़दार कर दिया है। महिला शिक्षकों को व्हाट्सएप पर अश्लील संदेश भेजने के मामलों में जांच पूरी होते ही शिक्षा विभाग ने सख़्त रुख अपनाया है।
मुजफ्फरपुर डीईओ अरविन्द कुमार सिन्हा के निर्देश पर डीपीओ स्थापना इन्द्र कुमार कर्ण ने दो शिक्षकों को निलंबित कर दिया है, जबकि विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। कुढ़नी और मड़वन प्रखंड के स्कूलों से आई शिकायतों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ा दी है।
महिला शिक्षकों ने लिखित शिकायत में आरोप लगाया कि कुछ शिक्षक व्हाट्सएप को ब्लैकबोर्ड समझ बैठे हैं, जहां पढ़ाई नहीं बल्कि अश्लील चैट चल रही है। मामले की जांच कराई गई और संबंधित शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद डीईओ ने कड़ा फैसला लेते हुए कार्रवाई का आदेश दिया।


पहला मामला सकरा प्रखंड से जुड़ा है। यहां की एक शिक्षिका ने कुढ़नी स्थित उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत बीपीएससी से नियुक्त शिक्षक दीपक कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। बताया गया कि दीपक कुमार पहले सकरा में पदस्थापित थे और वहीं से यह सिलसिला शुरू हुआ। माध्यमिक डीपीओ की जांच में अश्लील चैटिंग की पुष्टि होने के बाद उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया गया।
दूसरा मामला मड़वन प्रखंड का है, जहां एक प्राथमिक विद्यालय के पंचायत शिक्षक संतोष कुमार दास पर महिला शिक्षक को लगातार अश्लील संदेश भेजने का आरोप लगा। पीड़िता ने यह भी बताया कि विरोध करने पर उसे प्रताड़ना और धमकियां दी जाने लगीं। इस मामले में पंचायत शिक्षक के निलंबन की अनुशंसा पंचायत सचिव राज महमदपुर को भेज दी गई है।
जानकारी के अनुसार, पिछले चार महीनों में दो दर्जन से अधिक महिला शिक्षकों ने इस तरह के शोषण की शिकायत की है। कई शिक्षिकाएं धमकी के डर से लिखित शिकायत देने से पीछे हट गईं। पारू प्रखंड के तीन मामलों में अब भी जांच जारी है। डीईओ अरविन्द कुमार सिन्हा ने साफ कहा है कि ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर सीधा निलंबन होगा, किसी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी।
इस पूरे प्रकरण ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या स्कूलों में पाठ्यक्रम बदल गया है? अगर ब्लैकबोर्ड से व्हाट्सएप तक का यह गलत सफर नहीं रुका, तो शिक्षा का मंदिर बार-बार शर्मसार होता रहेगा। फिलहाल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट संदेश दे दिया है—गंदी सोच और अश्लील चैट का अंजाम, सीधा सस्पेंशन।