-मोबाइल देखते समय 10 वर्षीय छात्र की संदिग्ध मौत, अमरोहा की घटना ने सेहत और तकनीक पर खड़े किए सवाल
संवाददाता।अमरोहा(यूपी)।
एक हैरतअंगेज़ और दिल दहला देने वाला मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा ज़िले से सामने आया है, जिसने बच्चों की सेहत, तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल और अभिभावकीय निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंडी धनौरा क्षेत्र के जुझैला गांव में दस वर्षीय छात्र मयंक की अचानक हुई मौत से पूरा परिवार सदमे में है।
जानकारी के अनुसार, मयंक पूरी तरह सामान्य अवस्था में घर के अंदर पलंग पर बैठकर मोबाइल फोन देख रहा था। इसी दौरान अचानक वह पीछे की ओर गिर पड़ा और बेहोश हो गया। परिजन घबराकर उसे तत्काल नज़दीकी चिकित्सक के पास लेकर पहुंचे, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया। एक हंसता-खेलता और स्वस्थ दिखाई देने वाला बच्चा पल भर में जिंदगी की जंग हार गया।
प्राथमिक चिकित्सकीय परीक्षण में डॉक्टरों ने प्रथम दृष्टया मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया है। हालांकि इतनी कम उम्र में हृदय गति रुकने जैसी स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

परिजनों का कहना है कि मयंक को किसी भी तरह की गंभीर बीमारी नहीं थी और न ही पहले कभी हार्ट या न्यूरोलॉजिकल समस्या के कोई लक्षण सामने आए थे।
इस घटना पर आईजीआईएमएस के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. वेद प्रकाश ने महत्वपूर्ण चिकित्सकीय पहलुओं की ओर ध्यान दिलाया है। उनके अनुसार, छोटे बच्चों का मस्तिष्क पूरी तरह विकसित नहीं होता और मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडिएशन कान और मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। साथ ही उन्होंने यह भी आशंका जताई कि मोबाइल देखते समय चारपाई से गिरने के कारण सिर में गंभीर चोट लग सकती है, जिससे ब्रेन हेमरेज या अचानक न्यूरोलॉजिकल फेल्योर की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। हालांकि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत चिकित्सकीय जांच के बाद ही संभव है।
घटना की सूचना मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई। रिश्तेदार और ग्रामीण बड़ी संख्या में पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। गमगीन माहौल में परिजनों ने गंगा तट पर मयंक का अंतिम संस्कार कर दिया।
यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि बच्चों के हाथों में बढ़ते मोबाइल इस्तेमाल और उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अभिभावकों और समाज को बच्चों की सेहत और सुरक्षा को लेकर और अधिक सतर्क होने की आवश्यकता है।










