-भारतीय भाषा परिवार और भाषाई एकता पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित
-महेश प्रसाद सिन्हा साइंस कॉलेज में भाषाई एकता और भारतीय ज्ञान परंपरा पर हुआ मंथन
मुजफ्फरपुर।दीपक।
महेश प्रसाद सिन्हा साइंस कॉलेज, मुजफ्फरपुर एवं भारतीय भाषा समिति, शिक्षा मंत्रालय (भारत सरकार) के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय भाषा परिवार और भाषाई एकता” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया। यह सेमिनार चार चरणों—उद्घाटन सत्र, दो तकनीकी सत्र तथा समापन सत्र—में संपन्न हुआ।
सेमिनार का उद्घाटन बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) दिनेश चंद्र राय ने दीप प्रज्वलन, मंत्रोच्चार एवं विश्वविद्यालय कुलगीत के वादन के साथ किया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजीव कुमार एवं अन्य सदस्यों द्वारा अतिथियों का पुष्प गुच्छ, मोमेंटो एवं शॉल भेंट कर सम्मान किया गया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. (डॉ.) दिनेश चंद्र राय ने कहा कि भारत आज राष्ट्र निर्माण के स्वर्णिम काल में है, जहाँ भाषाई एकता बहुभाषी संस्कृति को सशक्त रूप से जोड़ने का कार्य कर रही है। इस अवसर पर मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) मोहम्मद जहांगीर वारसी (ए.एम.यू., अलीगढ़), अध्यक्ष, लिंग्विस्टिक सोसाइटी ऑफ इंडिया ने पाणिनि रचित अष्टाध्यायी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए संस्कृत को भारतीय भाषाओं की जननी बताया। उन्होंने कहा कि स्थानीय भाषाएँ ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा की आधारशिला हैं। इस दौरान भारतीय भाषा समिति द्वारा प्रकाशित दो पुस्तकों का विमोचन भी कुलपति द्वारा किया गया।
विशिष्ट अतिथि महाराजगंज कॉलेज, महाराजगंज के प्राचार्य डॉ. सुजीत कुमार चौधरी ने मातृभाषा के माध्यम से राष्ट्र प्रगति पर बल दिया। उद्घाटन सत्र का मंच संचालन डॉ. आशुतोष एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नवीन कुमार ने किया।

तकनीकी सत्र: भाषाई इतिहास और चुनौतियाँ
प्रथम तकनीकी सत्र में पूर्व परीक्षा नियंत्रक डॉ. मनोज कुमार ने भारतीय भाषाओं के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर चर्चा की। लंगट सिंह महाविद्यालय के भोजपुरी विभागाध्यक्ष डॉ. जयकांत सिंह ने अंग्रेजी के बढ़ते प्रयोग पर चिंता जताते हुए मातृभाषा के प्रति गौरव की अपील की। एल.एन.टी. महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. ममता रानी ने वैश्वीकरण के दौर में हिंदी और मातृभाषाओं की भूमिका तथा नई शिक्षा नीति-2020 से मिले प्रोत्साहन पर प्रकाश डाला।
इस सत्र में डॉ. कृष्ण पासवान (आर.सी.एस. कॉलेज, मंझौल) ने फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ के साहित्य में भारतीय भाषाओं के स्वाभाविक प्रयोग पर आधारित शोध पत्र प्रस्तुत किया। डॉ. राजेश्वर कुमार ने संस्कृत को भारतीय संस्कृति की आधारशिला बताया। सत्र की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. राजीव कुमार ने की, जबकि मंच संचालन डॉ. अरविंद कुमार सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शिशिर कुमार ने किया।
द्वितीय तकनीकी सत्र:
द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता पूर्व कुलपति डॉ. अमरेन्द्र कुमार यादव ने की। उन्होंने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा पर सरकारी निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. प्रमोद कुमार ने भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति के अंतर्संबंधों पर विचार रखे। डॉ. श्रीप्रकाश पाण्डेय ने राष्ट्र निर्माण में भाषाई उपयोगिता की भूमिका रेखांकित की। डॉ. ज्योति नारायण सिंह ने स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय भाषाओं के पारस्परिक संबंधों तथा विज्ञान-तकनीक में भाषा की भूमिका पर प्रकाश डाला। इस सत्र का मंच संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन भी डॉ. अरविंद कुमार सिंह और डॉ. शिशिर कुमार द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथियों को सम्मानित किया गया। सेमिनार में सवा सौ से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए तथा डॉ. वंदना श्रीवास्तव द्वारा रचित पुस्तक “भोजपुरी कला के बहाने” का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।









