-SKMCH में मानवता शर्मसार: कफन के अभाव में बेडशीट से ढंके जा रहे शव, चार घंटे तक स्ट्रेचर पर पड़ा रहा पार्थिव शरीर
मुजफ्फरपुर। सरकारी स्तर पर मृतकों के सम्मानजनक अंतिम प्रबंधन को मानवाधिकार का हिस्सा माना जाता है, लेकिन मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) से सामने आई तस्वीरें व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। आरोप है कि अस्पताल में कफन की उपलब्धता नहीं होने के कारण मृत मरीजों के शवों को पुरानी बेडशीट अथवा परिजनों की चादर से ढंककर औपचारिकता पूरी की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, पूर्वी चंपारण के चौक बाजार निवासी संजय चौधरी की मौत के बाद उनका पार्थिव शरीर स्ट्रेचर पर रखकर इमरजेंसी वार्ड की सीढ़ियों के नीचे छोड़ दिया गया। परिजनों ने बताया कि अस्पताल की ओर से कफन उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके बाद उन्होंने स्वयं बेडशीट से शव को ढंका। बताया जाता है कि शव करीब चार घंटे तक वहीं पड़ा रहा और इस दौरान लोग उसके पास से आवाजाही करते रहे।
अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में प्रतिदिन औसतन चार से पांच मरीजों की मौत होती है। कानूनी एवं चिकित्सकीय प्रक्रियाएं पूरी होने तक शवों को स्ट्रेचर पर ही रखा जाता है। ऐसे में इमरजेंसी वार्ड में भीड़भाड़ के बीच मरीजों और उनके परिजनों को शवों के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। उमस भरे मौसम में लंबे समय तक शव पड़े रहने से संक्रमण और असुविधा की आशंका भी बनी रहती है।

मृतक संजय चौधरी के परिजनों ने आरोप लगाया कि शव वाहन की अनुपलब्धता के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा। चिकित्सकों द्वारा दोपहर करीब साढ़े बारह बजे आवश्यक कागजात तैयार कर दिए गए थे, लेकिन शाम चार बजे के बाद ही शव वाहन उपलब्ध हो सका। गांव पहुंचते-पहुंचते शाम हो गई, जिसके कारण उसी दिन अंतिम संस्कार करना संभव नहीं हो पाया।
गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही निर्देश दिया है कि अस्पताल में शव वाहन उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में निजी एंबुलेंस की व्यवस्था कर शव को घर तक पहुंचाया जाए। हालांकि, आरोप है कि आदेश जारी होने के कई महीने बाद भी SKMCH में यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सकी है।
मामले पर अस्पताल अधीक्षक डॉ. महेश प्रसाद ने कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि यदि कफन या अन्य आवश्यक सामग्री का स्टॉक समाप्त हो गया है तो उसकी मांग की जानी चाहिए थी। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है।
इस घटना के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली और मृतकों के सम्मानजनक प्रबंधन को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।











