-‘आदि कृति’: जनजातीय कला परंपराओं की निरंतरता का उत्सव
वाराणसी।
भारत कला भवन संग्रहालय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में भारतीय जनजातीय कला परंपराओं को समर्पित विशेष प्रदर्शनी ‘आदि कृति’ का शुभारंभ 17 दिसंबर 2025 को अपराह्न 3:00 बजे अस्थायी प्रदर्शनी हॉल में हुआ। यह प्रदर्शनी भारत कला भवन संग्रहालय और भारतीय जनजातीय विपणन विकास संघ मर्यादित (TRIFED) के संयुक्त प्रयास से आयोजित की गई है।
प्रदर्शनी आम जनता के लिए 30 दिसंबर 2025 तक प्रतिदिन प्रातः 10:30 बजे से सायं 4:30 बजे तक खुली रहेगी। ‘आदि कृति’ के माध्यम से भारत की समृद्ध जनजातीय कला परंपराओं की ऐतिहासिक निरंतरता और समकालीन अभिव्यक्तियों को एक साझा मंच पर प्रस्तुत किया गया है।

प्रदर्शनी में भारत कला भवन के संग्रह से चयनित जनजातीय कलाकृतियों को समकालीन जनजातीय कलाकारों के कार्यों के साथ प्रदर्शित किया गया है, जिससे पीढ़ियों से चली आ रही कलात्मक चेतना और सांस्कृतिक विरासत की सशक्त झलक मिलती है।
इसके प्रमुख आकर्षणों में वस्त्र एवं सजावटी कला संग्रह से चयनित जनजातीय परिधान, आभूषण तथा घरेलू उपयोग की वस्तुएँ शामिल हैं। साथ ही गोंड, पिथोरा और वारली जैसी प्रसिद्ध जनजातीय कला शैलियों के प्रतिरूप और चयनित मौलिक चित्र दर्शकों को प्रकृति, लोकविश्वास और सामुदायिक जीवन से जुड़ी अभिव्यक्तियों से परिचित कराते हैं।
कुल मिलाकर ‘आदि कृति’ प्रदर्शनी जनजातीय कला की सृजनात्मक शक्ति, सांस्कृतिक निरंतरता और कलात्मक वैभव का प्रभावशाली उत्सव बनकर उभरी है, जिसे विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, कला प्रेमियों और आम दर्शकों द्वारा सराहा जा रहा है।














