-पंच परिवर्तन के पांच प्रमुख आयाम हैं, स्वदेशी बोध, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता व कुटुम्ब प्रबोधन : शिवम
-संगठित समाज, मजबूत राष्ट्र: रघुनाथपुर में संघ का प्रेरक सहगणवेश कार्यक्रम संपन्न
मोतिहारी, राजन द्विवेदी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष अवसर पर पूरे देशभर में विभिन्न प्रखंडों, मंडलों और नगर स्तरों पर बस्ती सहगणवेश कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में आज मोतिहारी नगर के रघुनाथपुर पूर्वी बस्ती में एक भव्य सहगणवेश कार्यक्रम द स्टडी पार्क परिसर में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर बस्ती की अनेक शाखाओं से आए स्वयंसेवकों ने एकत्र होकर कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यक्रम का शुभारंभ मोतिहारी- रक्सौल के जिला प्रचारक शिवम सोनू और भरत नगर के उप नगर कार्यवाह अभिमन्यु कुमार द्वारा शस्त्र पूजन से हुआ। इसके उपरांत ध्वजारोहण किया। जिसने वातावरण को राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत कर दिया। मंच से सामूहिक गीत अभिषेक कुमार, एकल गीत सुधांशु कुमार और अमृत वचन अरुण कुमार द्वारा प्रस्तुत किए गए। पूरे कार्यक्रम का संचालन अंकित कुमार ने कुशलतापूर्वक किया।
मुख्य आकर्षण रहा शिवम सोनू का बौद्धिक संबोधन। उन्होंने संघ द्वारा लिए गए पंच परिवर्तन विषय पर विस्तार से विचार रखते हुए कहा कि यह समय भारत के लिए निर्णायक है। पंच परिवर्तन के पांच प्रमुख आयाम हैं। जिसमें स्वदेशी का बोध, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और कुटुम्ब प्रबोधन है। यदि समाज में सशक्त रूप से लागू किए जाएं तो भारत विश्वगुरु बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ सकता है।

उन्होंने समझाया कि स्वदेशी का बोध केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता का विषय नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली से जुड़ा हुआ है। नागरिक कर्तव्यों के प्रति सजग होकर ही एक समृद्ध राष्ट्र का निर्माण संभव है। पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति सुरक्षित रह सके। सामाजिक समरसता से समाज में व्याप्त ऊँच-नीच और भेदभाव मिटेंगे तथा सद्भाव की स्थापना होगी। वहीं कुटुम्ब प्रबोधन भारतीय परिवार व्यवस्था को मजबूत करेगा, जो वर्तमान समय में एकल परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण चुनौती का सामना कर रही है।
शिवम सोनू ने आगे कहा कि भारतीय संस्कृति की रक्षा करना आज सबसे बड़ा दायित्व है। समाज अब जाग्रत हो चुका है, लेकिन उसे संगठित होकर चुनौतियों का सामना करना होगा। हिन्दू समाज को यह समझना होगा कि उसके सामने क्या संकट हैं और उनसे बचने के उपाय क्या हो सकते हैं। स्वयंसेवकों का कर्तव्य है कि वे समाज को एकजुट रखें और किसी भी प्रकार की टूट-फूट को रोकें।
कार्यक्रम का समापन संघ प्रार्थना और प्रसाद वितरण से हुआ। इस अवसर पर अधिकारी अशोक बैठा, अधिकारी चंद्रशेखर पांडेय और अधिकारी हृदयानंद पांडेय समेत बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। पूरे कार्यक्रम में शिस्त, अनुशासन और संगठन की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी।












