-नेपाल-भारत बॉर्डर पर बढ़ी गांजा तस्करी, कोशी प्रदेश बना तस्करों का ट्रांजिट प्वाइंट
➡️ अररिया और सुपौल से सटे नेपाल के इलाकों से हो रही तस्करी
➡️ एसएसबी और नेपाल पुलिस लगातार कर रही गांजा बरामदगी
➡️ मुख्य सरगना तक पहुंचने में नाकाम सुरक्षा एजेंसियां
अररिया: भारत-नेपाल सीमा पर गांजा तस्करी का नेटवर्क लगातार सक्रिय है। भारत में एसएसबी और पुलिस जहां गांजा तस्करों को पकड़ रही है, वहीं नेपाल की सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) और नेपाल पुलिस भी लगातार खेप जब्त कर रही है। लेकिन इसके बावजूद तस्करी पर पूरी तरह नकेल कसने में अब तक सफलता नहीं मिल पाई है।
कैसे हो रही है तस्करी?
नेपाल के पहाड़ी इलाकों से गांजे को तराई क्षेत्र में लाकर चोरी-छिपे भारत भेजा जाता है। तस्करी के इस नेटवर्क में पकड़े जाने वाले लोग अधिकतर कैरियर (छोटे तस्कर) होते हैं, जिनका काम गांजे को बॉर्डर पार कराना होता है। लेकिन मुख्य सरगना अब तक पुलिस की पकड़ से दूर हैं।
कोशी प्रदेश बना ट्रांजिट प्वाइंट:
नेपाल के कोशी प्रदेश में स्थित सीमावर्ती इलाके गांजा तस्करों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन चुके हैं। यहां के गोदामों में गांजा जमा किया जाता है और फिर मौका मिलते ही इसे भारत भेज दिया जाता है।
तस्करी के नए तरीके:
नेपाल के तस्कर निजी वाहनों पर सरकारी नंबर प्लेट लगाकर गांजे की खेप सीमा तक पहुंचा रहे हैं।

ग्रामीण इलाकों के जरिए गांजे को भारत में प्रवेश कराया जा रहा है।
नेपाल और भारत दोनों ओर गांजे की खेप पकड़ी जा रही है, लेकिन तस्करी रुकने का नाम नहीं ले रही।
बॉर्डर पर बढ़ी चौकसी:
भारत में एसएसबी और पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, जबकि नेपाल पुलिस भी तस्करों के खिलाफ अभियान चला रही है। लेकिन मुख्य सरगना तक पहुंचने में दोनों देशों की एजेंसियां अब तक असफल रही हैं।
क्या आगे हो सकता है?
गांजा तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए भारत और नेपाल दोनों देशों को संयुक्त ऑपरेशन चलाने की जरूरत है। सीमा पार तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए खुफिया तंत्र को और मजबूत करना होगा।
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