-जर्जर बांध क्षेत्र से बन्दरा के लोग चिंतित
-बूढ़ी गंडक नदी के बांध एवं सड़क का जीर्णोद्धार जरूरी
-कई सालों से होती रही है स्थायी एवं ठोस कार्य की मांग
-जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से भी लोगों में नाराजगी
मुजफ्फरपुर/बन्दरा। दीपक ।
प्रखंड के पश्चिम से पूरब तक तकरीबन 15 किलोमीटर में बूढ़ी गंडक नदी के बाएं तटबंध में जगह-जगह रैन कट, ब्रोकर आदि रहने की वजह से बांध काफी कमजोर है। क्षतिग्रस्त बांध के भरोसे अबकी बाढ़ की हालत का सामना करना मुश्किल होगा। स्थानीय ग्रामीणों का बताना है कि इस बाएं तटबंध के जीर्णोद्धार की मांग कई सालों पहले से की जाती रही है, लेकिन प्रत्येक साल मरम्मती कार्य के नाम पर औपचारिकता पूरी की जाती है और इसी औपचारिकता के सहारे बाढ़ आपदा को झेलने की मजबूरी प्रखंड एवं आसपास के क्षेत्र के लोगों की होती है। कहीं रैन कट है तो कहीं जंगली जानवरों के रैम बसेरा(मांद) बांध के अंदर बनाए गए हैं। कहीं चूहों,गीदड़ों, नेवलों आदि के द्वारा बांध को खोदा गया है।इन वजहों से बांध का कई स्पॉट संकीर्ण है। कहीं सलुइस गेट में रिसाव की वजह से बांध कमजोर है। इस तरह की समस्या बांध क्षेत्र में दर्जनों जगहों पर है,लेकिन कई ऐसे स्पॉट हैं जो काफी क्षतिग्रस्त होने के कारणों से अति संवेदनशील बने हुए हैं।

बन्दरा सीओ ने अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ किया तटबंध का निरीक्षण:
इस बीच बन्दरा के सीओ अंकुर राय ने गुरुवार को अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ बन्दरा अंचल क्षेत्र अंतर्गत जरंगी चौक बांध से होते हुए बड़गांव,सिमरा,पीरापुर,रामपुरदयाल,रतवारा,तेपरी तक संपूर्ण बांध क्षेत्र में तकरीबन 14 से 15 किलोमीटर बांध का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जगह-जगह स्थित सलुइस गेट का भी निरीक्षण किया। सीओ ने बताया कि जहां कहीं भी मरम्मती की आवश्यकता है। उन जगहों को चिन्हित किया गया है। सीओ ने बताया कि बांध क्षेत्र में तकरीबन 12 से 15 ऐसे स्पॉट हैं, जहां बालू बंद बोरों के रखरखाव की अत्यंत जरूरत है। वही चार-पांच ऐसे क्षतिग्रस्त स्पॉट है, जहां मरम्मती कार्य चलाए जाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इस लिहाज से चिन्हित स्थलों की फोटोग्राफ्स,वीडियो क्लिप और संबंधित रिपोर्ट बाढ़ एवं नदी बांध विभाग से जुड़े अभियंता को भेजी गई है। इस मामले में आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है, ताकि नदी में जल भराव के साथ ही बाढ़ की स्थिति में बांध सुरक्षित रखा जा सके।वरीय अधिकारियों को भी इस संदर्भ में अवगत कराया गया है।












