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SBI का बीजेपी से हुआ गठबंधन, दोनों छिपाएंगे चुनावी बॉन्ड की जानकारी : सत्येन्द्र कुमार मिश्र

चंपारण की खबर::

-SBI का बीजेपी से हुआ गठबंधन, दोनों छिपाएंगे चुनावी बॉन्ड की जानकारी : सत्येन्द्र कुमार मिश्र

मोतीहारी / राजन द्विवेदी।

भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्य कमिटी सदस्य सह पूर्वी चंपारण के जिला सचिव सत्येन्द्र कुमार मिश्र ने कहा कि बीजेपी और एसबीआई के बीच गठबंधन हो गया है तथा दोनो ही मिल कर चुनावी बॉन्ड जैसे भ्रष्टाचार की जानकारी छिपाएंगे। श्री मिश्र ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी की इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक करार देते हुए इसे रद कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड योजना के तहत राजनीतिक दलों को प्राप्त चंदे का खुलासा करने के निर्देश दिये थे। सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (SBI) को निर्देश दिये थे की वो चुनावी चंदे से संबंधित संपूर्ण जानकारी 6 मार्च 2024 (लोकसभा चुनाव के पूर्व) के पहले सार्वजनिक करते हुए चुनाव आयोग को सौंपे। सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फ़ैसले का पूरे देश ने बढ़ चढ़कर स्वागत किया था और इसे चुनाव में कालेधन के उपयोग और सत्ता में पूंजीपतियों की ग़ैर क़ानूनी हिस्सेदारी के खिलाफ सबसे बड़ा कदम माना जा रहा था। किंतु सत्ताधारी बीजेपी, जो कि चुनावी बॉन्ड योजना की इकलौती सबसे बड़ी लाभार्थी है, सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद से बेचैन थी। बीजेपी को डर था कि उसके चंदा देने वाले मित्रों की जानकारी सार्वजनिक होते ही बीजेपी की बेईमानी का सारा भंडाफोड़ हो जायेगा।
चंदा कौन दे रहा था, उसके बदले उसको क्या मिला। उनके फ़ायदे के लिए कौन से क़ानून बनाये गये। क्या चंदा देने वालों के ख़िलाफ़ जांच बंद की गयी। क्या चंदा लेने के लिए जाँच की धमकी दी गयीं, यह सब पता चल जाएगा।*बीजेपी और मोदी सरकार ने भारतीय स्टेट बैंक पर जानकारी साझा नहीं करने का दबाव बनाया और कल स्टेट बैंक ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आवेदन देकर जानकारी साझा करने के लिए 30 जून तक का समय माँग लिया।देश के सबसे बड़े पूर्णतः कम्प्यूटरीकृत बैंक को इलेक्टोरल बॉंड की जानकारी देने के लिये 5 माह का समय क्यों चाहिए ? जबकि संपूर्ण जानकारी एक क्लिक से 5 मिनट में निकाली जा सकती है।


स्टेट बैंक ने जानकारी देने के लिये और समय की मांग जानकारी देने की अंतिम तिथि के एक दिन पहले ही क्यों की ? क्या कितना समय लगेगा इसकी गणना करने के लिये भी एक माह का समय लग गया ? 48 करोड़ अकाउंट, 66 हज़ार एटीएम और 23 हज़ार ब्रांच संचालित करने वाली SBI को केवल 22217 इलेक्टोरल बॉंड की जानकारी देने के लिये 5 महीने का समय चाहिए ?
उन्होने कहा कि सवाल उठता है कि क्या देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक भी अब बीजेपी सरकार की आर्थिक अनियमितता और कालेधन के स्रोत को छिपाने का ज़रिया बन रहा है।
या एक राजनीतिक दल और एक सरकारी बैंक मिलकर देश की उच्चतम अदालत के फ़ैसले को ठेंगा दिखा रहे हैं।
श्री मिश्र ने कहा है कि मैं जानना चाहता हूं कि लोकसभा चुनाव के पहले देश की जनता को सही जानकारी प्राप्त कर मतदान में सही निर्णय लेने का हक़ नहीं है ?
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष स्टेट बैंक ने जानकारी देने के लिये नहीं बल्कि बीजेपी के कुकर्मों को छिपाने के लिये समय माँगा है। देश की जनता अब अच्छे से समझ रही है कि किस तरह से सरकारी एजेंसियों/संस्थाओं पर दबाव डालकर सच्चाई को छिपाया जा रहा है। देश की जनता यह भी समझ रही है हक़ीक़त छिपाने, और झूठी कहानी बनाने में मीडिया भी मोदी सरकार की हमजोली बनी हुई है।
उन्हो ने साफ शब्दों में कहा की जनता को इस पूरे मामले में जो समझना था, वो समझ चुकी है। अब बैंक और बीजेपी चाहे कितने भी षड्यंत्र रच लें, जनता चंदे के इस पूरे खेल के समझ चुकी है और आगामी चुनावों में बीजेपी को सबक़ सिखाने के लिये तैयार है।