-“243 पराक्रम, एक चिराग: बिहार में NDA की नई चाल और विपक्ष की पुरानी उलझन”
✍🏻 पटना । दीपक कुमार तिवारी।
बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नाम सबसे अधिक चर्चा में है—चिराग पासवान। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चिराग पासवान जिस अंदाज़ में अपनी राजनीतिक सक्रियता और सांगठनिक शक्ति का प्रदर्शन कर रहे हैं, उसे देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि चिराग का ट्रेलर जारी है और ‘फुल एंड फाइनल’ गेम की स्क्रिप्ट तैयार हो चुकी है।
हर मंच से चिराग पासवान यही दोहराते हैं कि लोजपा (आर) 243 विधानसभा सीटों पर दमखम से उतरेगी। उनके भाषणों और बयानों में एक अलग तेवर है, जो उन्हें अन्य दलों से अलग खड़ा करता है। चाहे वो राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से मुलाकात कर रामविलास पासवान की जयंती का न्योता देना हो या मीडिया से घिरकर विपक्ष पर हमला करना—चिराग हर मोर्चे पर मुखर हैं।
🔥 तेजस्वी पर सीधा हमला:
राजद नेता तेजस्वी यादव को निशाने पर लेते हुए चिराग ने स्पष्ट कहा,
> “अगर 2020 के विधानसभा चुनाव में मैं एनडीए के साथ होता, तो राजद कभी नंबर वन पार्टी नहीं बनती।”
चिराग का दावा है कि लोजपा के प्रत्याशी ही कई सीटों पर एनडीए के वोट काट गए, जिससे राजद को अप्रत्याशित लाभ मिला।
🗣️ “बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट” का नारा फिर बुलंद:
चिराग का ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ नारा फिर से चर्चा में है। उनका कहना है कि उन्हें बिहार आने और चुनाव लड़ने से डराने की साजिशें हो रही हैं, लेकिन वे “तोड़ने वालों के बीच जोड़ने की राजनीति” करेंगे।
> “मेरे रास्ते में बाधाएं खड़ी की जा रही हैं, लेकिन मैं हतोत्साहित नहीं हूं,”
— ये कहते हुए चिराग ने साफ कर दिया कि 2025 विधानसभा चुनाव उनके लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई है।

📍 दलित राजनीति का नया संतुलन:
दलित नेतृत्व को लेकर चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच जुबानी जंग अब खुलकर सामने है।
हाल ही में शाहाबाद क्षेत्र में आयोजित सभा में चिराग ने न सिर्फ दलित-महादलित वर्ग को जोड़ा, बल्कि सर्वसमाज की भीड़ ने उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता को और पुष्ट किया। भीड़ को देखकर जीतन राम मांझी भी कटाक्ष करने से नहीं चूके।
शाहाबाद क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत को समझते हुए एनडीए ने चिराग को इस इलाके की जिम्मेदारी सौंपी है, जहां महादलित और पासवान वोटर निर्णायक भूमिका में हैं।
वहीं, लोजपा (आर) यह सुनिश्चित करना चाहती है कि पासवान वोट भाकपा माले जैसे विरोधी दलों में न जाएं।
🎯 एनडीए की नई रणनीति: चिराग बने चेहरा
ऐसा प्रतीत हो रहा है कि एनडीए ने बिहार में चिराग पासवान को अगली रणनीति का प्रमुख चेहरा बना दिया है।
243 सीटों पर संगठन खड़ा करने की चुनौती को चिराग व्यक्तिगत मिशन बना चुके हैं।
बिहार की राजनीतिक बिसात पर चिराग पासवान का यह पराक्रम सिर्फ शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक रणनीतिक घेराबंदी है।
विपक्ष के लिए यह एक चेतावनी भी है कि आने वाले समय में लोजपा (आर) सिर्फ एनडीए की सहायक शक्ति नहीं रहेगी, बल्कि एक निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार है।
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