-500 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की होगी मुख्य सचिव स्तर पर समीक्षा
-NH-139W फोरलेन में मुआवजा भुगतान बना अड़चन
मुजफ्फरपुर। बिहार में 500 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली बड़ी और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की प्रगति की जल्द ही मुख्य सचिव स्तर पर समीक्षा की जाएगी। इसे लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के भू-अर्जन निदेशालय ने सभी जिलाधिकारियों से परियोजनाओं की ताजा स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। विभागीय निर्देश के बाद मुजफ्फरपुर समेत राज्य के 15 जिलों ने अपनी रिपोर्ट मुख्यालय को सौंप दी है। संभावना है कि इसी महीने इन परियोजनाओं को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।
मुजफ्फरपुर जिले की रिपोर्ट में साहेबगंज-मानिकपुर NH-139W फोरलेन परियोजना को प्रमुखता से शामिल किया गया है। परियोजना के निर्माण में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा भुगतान से जुड़ी अड़चनें अब भी चुनौती बनी हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार सरैया समेत तीन मौजा में रैयतों को मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। पूर्व में मुआवजा भुगतान में देरी के कारण परियोजना के निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न हुई थी।

रिपोर्ट में बताया गया है कि मानिकपुर और अबुचक क्षेत्र में अभी मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। करीब 2.5 किलोमीटर के दायरे में आने वाली रैयती भूमि के भू-अर्जन और मुआवजा भुगतान की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। इसके अलावा कुछ चिह्नित स्थानों पर चकबंदी से जुड़े विवाद के कारण भी निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है।
साहेबगंज-मानिकपुर फोरलेन परियोजना का हिस्सा पूर्वी चंपारण जिले में भी आता है। वहां से भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार करीब तीन किलोमीटर के दायरे में मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा भुगतान से जुड़ी समस्याओं का समाधान परियोजना को गति देने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजस्व विभाग के निर्देश पर पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, बांका, भागलपुर, मुंगेर, जमुई, नवादा, गया, सारण, सिवान, भोजपुर, पटना, शेखपुरा, लखीसराय और मुजफ्फरपुर जिलों से बड़ी परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट भेजी गई है।
मुख्य सचिव स्तर की प्रस्तावित समीक्षा बैठक में भूमि अधिग्रहण, मुआवजा भुगतान, चकबंदी विवाद समेत अन्य प्रशासनिक अड़चनों की समीक्षा की जाएगी। संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित समाधान और लंबित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए जाने की संभावना है। इससे लंबे समय से भूमि अधिग्रहण संबंधी अड़चनों का सामना कर रही परियोजनाओं के निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है।












