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182 साल पुराने जिला स्कूल का बदलेगा नाम, अब बनेगा ‘सरस्वती विद्या निकेतन’

-182 साल पुराने जिला स्कूल का बदलेगा नाम, अब बनेगा ‘सरस्वती विद्या निकेतन’

मुजफ्फरपुर। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी मॉडल स्कूल योजना के तहत जिले के 182 वर्ष पुराने ऐतिहासिक जिला स्कूल की पहचान नए स्वरूप में स्थापित होने जा रही है। नई व्यवस्था के तहत विद्यालय का नाम बदलकर सरस्वती विद्या निकेतन रखा जाएगा। इसके साथ ही विद्यालय को आधुनिक सुविधाओं से लैस एक आदर्श शिक्षण संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा।
शिक्षा विभाग के निर्देश पर विद्यालय प्रशासन ने आधारभूत संरचना, संसाधनों और अन्य आवश्यकताओं से संबंधित विस्तृत प्रस्ताव विभाग को भेज दिया है। वर्ष 1844 में स्थापित यह विद्यालय जिले की शैक्षणिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। अब इसे अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त मॉडल विद्यालय के रूप में विकसित कर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और प्रतिस्पर्धी शिक्षा उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।
विद्यालय में वर्तमान में लगभग 1300 छात्र नामांकित हैं, जबकि 31 शिक्षक कार्यरत हैं। परिसर में 19 कमरे और एक बड़ा हॉल उपलब्ध है। मॉडल स्कूल के रूप में विकसित होने के बाद अतिरिक्त वर्ग कक्ष, आधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाएं और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं की आवश्यकता होगी। प्रयोगात्मक शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए मौजूदा प्रयोगशालाओं को भी अपग्रेड किया जाएगा।


जिला स्कूल परिसर में छात्रावास की सुविधा भी उपलब्ध है। नई योजना के तहत इसे चरणबद्ध तरीके से आवासीय विद्यालय का स्वरूप दिया जाएगा, ताकि दूरदराज के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
मॉडल विद्यालय बनने के बाद यहां स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक पुस्तकालय, अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाएं, डिजिटल शिक्षण संसाधन तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रारंभिक तैयारी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे छात्रों को बेहतर शिक्षण वातावरण और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिलेगी।
शिक्षा विभाग का उद्देश्य जिला स्कूल को उत्कृष्ट शिक्षण केंद्र के रूप में विकसित कर सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता को निजी शिक्षण संस्थानों के समकक्ष लाना है। इसके तहत आधारभूत संरचना, शिक्षण संसाधनों और शैक्षणिक गतिविधियों में व्यापक सुधार किए जाएंगे।
जिला स्कूल के अलावा जिले के प्रत्येक प्रखंड में भी एक-एक मॉडल स्कूल संचालित किया जा रहा है। इन विद्यालयों को भी चरणबद्ध तरीके से आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित कर राज्य के उत्कृष्ट सरकारी शिक्षण संस्थानों के रूप में विकसित किया जाएगा।
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल से सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, छात्रों को बेहतर अवसर प्राप्त होंगे तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के बीच शैक्षणिक अंतर को कम करने में मदद मिलेगी।