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हिंदी दिवस पर व्याख्यानमाला और कवि गोष्ठी आयोजित

-हिंदी दिवस पर व्याख्यानमाला और कवि गोष्ठी आयोजित

मुजफ्फरपुर।
जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन, मुजफ्फरपुर के तत्वावधान में हिंदी दिवस के अवसर पर आज थियोसोफिकल लाज, नया टोला में एक व्याख्यानमाला एवं कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार चित्तरंजन सिन्हा कनक ने की।

व्याख्यानमाला का विषय था – “अभी तक हिंदी राष्ट्रभाषा क्यों नहीं बनी?”। विषय प्रवेश करते हुए सम्मेलन के प्रधानमंत्री उदय नारायण सिंह ने कहा कि हिंदी आज तक राष्ट्रभाषा इसलिए नहीं बन सकी क्योंकि सत्ता में बैठे लोगों में इच्छा शक्ति का अभाव है। उन्होंने कहा कि संविधान सभा ने हिंदी को केवल दस वर्षों के लिए राजभाषा का दर्जा दिया था, लेकिन स्वतंत्रता के 78 वर्ष बाद भी इसे राष्ट्रभाषा का स्थान नहीं मिल पाया। अंग्रेज़ी माध्यम शिक्षा के अनावश्यक प्रसार को उन्होंने हिंदी के मार्ग में सबसे बड़ा अवरोध बताया।

अध्यक्षीय संबोधन में चित्तरंजन सिन्हा कनक ने कहा कि हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा न मिलना अत्यंत निंदनीय है और इसके पीछे केवल सरकारी उदासीनता जिम्मेदार है।
कार्याध्यक्ष डॉ. शारदाचरण ने कहा कि हिंदी जोड़ने वाली भाषा है, लेकिन यह सरकारी षड्यंत्र की शिकार बनी हुई है।
डॉ. विनोद कुमार सिन्हा ने टिप्पणी की कि हिंदी आज वैश्विक स्तर पर सम्मानित है, लेकिन अपने ही देश में उपेक्षित।
प्रेम कुमार वर्मा ने हिंदी को अपनी आन-बान-शान की भाषा बताया, जबकि डॉ. लोकनाथ मिश्र ने इसे प्रेम और भाईचारे का प्रतीक कहा।
पत्रकार प्रमोद नारायण मिश्र ने सरकार की अकर्मण्यता को दोषी ठहराते हुए कहा कि हिंदी आमजन की भाषा है और इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा मिलना ही चाहिए।
डॉ. हरिकिशोर प्रसाद सिंह ने सांस्कृतिक एवं साहित्यिक चेतना जगाने पर जोर दिया।

इसके अलावा मधु मंगल ठाकुर, उमानाथ प्रसाद सिंह, उमाशंकर प्रसाद चौरसिया, देवेंद्र प्रसाद शर्मा, नीरज कुमार, अमृत मणि सहित अनेक साहित्यप्रेमियों ने भी अपने विचार रखे।

दूसरे सत्र में भव्य कवि गोष्ठी आयोजित हुई। कवियों की प्रस्तुतियों पर तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा परिसर गूंज उठा और वातावरण रसपूर्ण व मनमोहक बना रहा।

कार्यक्रम का समापन मधु मंगल ठाकुर के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।