-हैप्पी न्यू ईयर की तल्ख़ियां
80 के दशक में एक दौर था जब महानायक अमिताभ बच्चन के सिनेमा को देखने के लिए दर्शक उतावले रहते थे । इसी क्रम में वह बोफोर्स का मामला आया और भारत की आवाम ने राजनीति के तहत महानायक, जो तब कांग्रेस से इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र से सांसद थे , का विरोध करना शुरू किया। हालांकि बोफोर्स कांड में अपने नाम की भनक मिलते ही अमिताभ बच्चन ने सांसद पद से इस्तीफा दे डाला था। बावजूद इसके विरोध के स्वर कायम थे । इस बीच ही उनकी चर्चित फिल्म शहंशाह रिलीज हुई जिसका व्यापक पैमाने पर विरोध किया गया था। हालांकि मजे की बात यह है कि विरोध में अधिकांश वैसे लोग शामिल थे जिन्होंने पहले दूसरे तीसरे शो तक शहंशाह फिल्म देख ली थी।

इसका प्रमाण है कि यह फिल्म मेगा हिट हुई और कला की कसौटी पर अमिताभ बच्चन खरे उतरे थे। ऐसा प्रतीत होता है कि नव वर्ष को लेकर बहुतेरे लोगों के अनर्गल प्रलाप इसी परिधि में आ रहे । अरे मनाने को तो हम लोग क्रिसमस , पोंगल, ईद बकरीद, बड़ा दिन छोटा दिन तक मना लेते हैं। खुशियां जता लेते हैं । एक दूसरे को गले लगा लेते हैं । फिर हैप्पी न्यू ईयर कहने से पहले न जाने क्या-क्या ख़्वाहिशें जता लेते हैं और खुद को कटघरे में खड़ा कर लेते हैं।
साभार:-नर्मदेश्वर मुज़फ़्फ़रपुरी।















