-ऐसे में कैसे चमकेगा अपना बिहार?कैसे होगा सड़कों का सौंदर्यीकरण?
-फोरलेन सड़क का किनारा बना गोइठा-चिपड़ी ठोकने का स्पॉट
मुजफ्फरपुर(बिहार)।दीपक कुमार तिवारी।
बिहार में मुजफ्फरपुर-दरभंगा फोरलेन सड़क का किनारा कई जगहों पर इन दिनों गोइठा-चिपड़ी ठोकने के स्पॉट के रूप में दिखने लगा है। लिहाजा इससे सड़क कमजोर होने की संभावना बढ़ गई है। फोरलेन सड़क के मेंटेनेंस और संरक्षण के लिए लगाए गए कार्य एजेंसी इन स्थलों पर ऐसे कार्यों पर रोक लगाने के बजाय बेफिक्र है। मुजफ्फरपुर- दरभंगा फोरलेन सड़क के बेनीबाद एवं आसपास के एरिया में कई जगहों पर फोरलेन सड़क के दोनों तरफ किनारों में कई जगहों पर पालतू मवेशियों के गोबरों से चिपड़ी-गोइठा ठोके जा रहे हैं या माल मवेशियों के गोबर इकट्ठे किए जा रहे हैं। जिसकी वजह से सड़क के कमजोर होने की संभावना है।बाबजूद इसकी फिक्र न स्थानीय जनप्रतिनिधियों को है, न हीं फोरलेन सड़क के संरक्षण के लिए लगाई गई कार्य एजेंसी को। लिहाजा देखा-देखी यह सिलसिला बेरोक-टोक बढ़ता जा रहा है। हमारे दैनिक भास्कर संवाददाता ने मुजफ्फरपुर-दरभंगा फोरलेन सड़क का जायजा लिया तो बेनीबाद एवं आसपास के एरिया में कई जगहों पर सड़क के दोनों किनारों में कहीं पत्थरों के ऊपर तो कहीं मिट्टी के भराठों पर गोबरों को ढेर कर रखी मिली तो कही गोबरों की गोइठा या चिपड़ी बनी हुई मिली। कहीं आजकल में बनाई गई ताजा एवं कच्चा चिपड़ी रखे थे तो कहीं कई दिनों पुरानी एवं सुखी हुई चिपड़ियां थी।

घरों में जलावन में जलाते हैं लोग:
सड़क के किनारे मिले दिनकर लाल ने बताया कि फोरलेन का किनारा चिपड़ी बनाने के लिए अच्छा जगह है। ढलान होने से चिपड़ी में धूप भी सहज एवं ठीक से लग जाता है।स्थानीय लोग चिपड़ी बनाकर यहां सुखाने के बाद अपने घरों में जलावन के रूप इसे प्रयोग करते हैं। लोगों ने बताया कि वे लोग माल मवेशी अपने घरों में पालते हैं और माल मवेशियों के गोबर को फोरलेन सड़क के किनारे लाकर चिपड़ी ठोककर छोड़ देते हैं और सूखने पर जलावन के लिए ले जाते हैं।धूप के अनुसार 3 से 4 दिन या 8 दिनों में यह सूखने के बाद उसे हटाकर दूसरा राउंड फिर बनाते हैं। सूखने पर घर में जलावन के लिए ले जाते हैं।मिट्टी के चूल्हों में यह अच्छे से जलता है।इसके आग(आंच)भी कड़क होते हैं। ज्यादा ठंड बढ़ जाने या कुहासा के समयों में इसे अलाव के रूप में भी जलाते हैं। कुछ लोग इसको बेचकर कुछ पैसा भी कमा लेते हैं। लिहाजा फोरलेन सड़क का किनारा कई जगहों पर चिपड़ी-गोइठा स्पॉट के रूप में दिखने लगा है। तमाम बातों के बावजूद इस बात की फिक्र ना फोरलेन सड़क के संरक्षण एवं मेन्टेन्स के लिए लगाई गई कार्य एजेंसी को है और ना ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों को।
देखादेखी बढ़ रहा प्रयोग:
लोगों का बताना है कि कई लोग नासमझी में सड़क के आहातों(किनारों)का प्रयोग कर रहे हैं तो कई लोग देखा-देखी में। किसी ने इसकी शुरुआत की होगी,फिर दूसरे ने किया फिर तीसरे ने ऐसा किया होगा और देखते ही देखते किनारों का प्रयोग कई लोगों ने करना शुरू कर दिया।

खिसकेंगे पत्थर तो कमजोर होंगी सड़कें:
कई जगहों पर निर्माण के साथ हीं फोरलेन सड़क निर्माण एजेंसी ने सड़क के किनारों में बड़े-बड़े पत्थरों को लगाया था। पत्थर इसलिए लगाए गए थे कि इससे सड़क की मजबूती हो पाएगी, लेकिन पत्थरों पर गोबरों के इकट्ठा रखने या चिपड़ी-गोइठा बनाने से मिट्टी के भुरभुरा होकर ढहने या पत्थरों के खिसकने की संभावना बढ़ जाती है। इन कारणों से सड़क कमजोर हो जाएंगी।ऐसा खासकर बरसात-बाढ़ के दिनों में ज्यादा सम्भव है।वहीं इससे स्वच्छता अभियान को भी ऐसे में झटका लगता है। किनारों में गंदगियों का साम्राज्य बढ़ता है।बीमारियां भी फैलती है।
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