#नितिशनामा
बिहार में भाजपा को सत्ता से बाहर करने के बाद संभवत किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री पहली बार मिले आम तौर पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री किसी दल के नहीं किसी देश और प्रदेश के होते हैं और कई सारे विदाई मुद्दों पर उनके साथ में बैठना चर्चा करना भी जरूरी होता है। खैर इस तस्वीर को ध्यान से देखिए और समझिए की लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर बिहार में क्या-क्या संभावना है पैदा हो सकती है हालांकि आज की सबसे बड़ी खबर यह है कि बिहार के उपमुख्यमंत्री और राजद के नायक तेजस्वी यादव ने अपने आवास पर अपने पार्टी के तमाम विधायको और मंत्रियों को बुलाकर गुप्त मंत्रणा की है। बिहार के राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले बिहार के मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर यह आम धारणा बिहार में बनी है कि नीतीश सबके हैं और नीतीश किसी के नहीं है। कभी बिहार में जंगल राज और भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी जंग छेड़ कर शून्य से शिखर तक पहुंचने वाले नीतीश कुमार को अब राजद भाता है और जिस दल ने उन्हें आगे करके आगे बढ़ाया अब वह उन्हें सांप्रदायिक नजर आता है हालांकि कई ऐसे मौके आए जब नीतीश कुमार भाजपा के साथ खड़े नजर आए। बिहार में नीतीश कुमार ने जिस परिपाटी को आगे बढ़ाया है वह आने वाले दिनों में सभी दलों के लिए राजधर्म होगा। नीतीश कुमार के सीएम के कुर्सी पर पहुंचने से लेकर अब तक अगर बीच में जीतन राम मांझी प्रकरण को छोड़ दिया जाए तो बिहार की सत्ता कमान नीतीश कुमार के हाथ में ही रही। अगर बिहार में शराबबंदी कानून सड़क बिजली पानी और विकास का श्रेय नीतीश कुमार के खाते में जाता है तो दूसरी तरफ बदहाल स्वास्थ्य शिक्षा व्यवस्था बेरोजगारों की बड़ी फौज उद्योग धंधे स्थापना के मामले में पूरी तरह फेल बिहार की बदहाली का भी ठीकरा उनके ही सर फूटता है।

आज जदयू जिस स्थिति में पहुंच चुकी है इसका भी श्रेय किसी दूसरे को नहीं जाता बिहार में राजद ने वापसी कर ली है उसका मुकाबला सीधे भाजपा से है जिन दलों को भाजपा से लड़ना है उन्हें राजद का नेतृत्व भी स्वीकार करना होगा। जातीय जनगणना कराकर बिहार में अपनी स्थिति मजबूत करने का दम भरने वाले लोगों को भी बड़ा झटका लगने वाला है जब उनके पास वास्तविक आंकड़ा पहुंचेगा। संख्या बल में मजबूत होने वाली जातियां सत्ता के समीकरण में अपनी हिस्सेदारी ढूंढेंगी ऐसे में बहुत कुछ गड़बड़ होगा। नीतीश कुमार अगर महागठबंधन के साथ 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ते हैं तो सबसे बड़ी कुर्बानी उन्हें ही देनी होगी ऐसी स्थिति में पार्टी में मजबूत जनआधार वाले नेता विद्रोह नहीं करेंगे इस बात की गारंटी भी कोई नहीं दे सकता।
#अनूप












