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सोशल मीडिया ने आपको सभी को दिमागी रूप से गुलाम बना दिया

-सोशल मीडिया ने आपको सभी को दिमागी रूप से गुलाम बना दिया

#दिमागी-गुलामी

सोशल मीडिया ने आपको हमको हम सभी को दिमागी रूप से गुलाम बना दिया है हम अपने जीवन के सभी पक्षों को इन दिनों सोशल मीडिया के मायाजाल में कैद करते जा रहे हैं सार्वजनिक जीवन से लेकर परिवारिक जीवन सब कुछ सोशल मीडिया पर कैद होते जा रहा है फेसबुक व्हाट्सएप व अन्य माध्यमों में मिलने वाले कमेंट लाइक को ही हम सच मान बैठे हैं हमें लगता है कि इतने कमेंट या लाइक आते हैं लोग इतना हमें प्यार करते हैं पर यह हमारे लिए सबसे बड़ी भूल है हम अपने निजी जीवन में खुद से दूर होते जा रहे हैं। अपने परिवार रिश्तेदारों मित्रों सबसे दूर होते जा रहे हैं और सोशल मीडिया तो यही चाहता है।हद है कि किसी परिचित के मौत पर हम सोशल मीडिया पर ही दुख व्यक्त कर देते हैं जबकि किसी के मांगलिक उत्सव की खुशियां भी हम सोशल मीडिया पर शेयर कर यह सोचते हैं कि हमने उसे बधाई दे दिया।जब कोई चीज मुफ्त मिल रही हो, तो समझ लेना कि आपको इसकी कोई बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।


नोबेल विजेता डेसमंड टुटू ने एक बार कहा था कि ‘जब मिशनरी अफ्रीका आए, तो उनके पास बाईबल थी, और हमारे पास जमीन। उनहोंने कहा ‘हम आपके लिए प्रार्थना करने आये हैं।’ हमने आखें बंद कर लीं,,, जब खोलीं तो हमारे हाथ में बाईबल थी, और उनके पास हमारी जमीन।’इसी तरह जब सोशल नैटवर्क साइट्स आईं, तो उनके पास फेसबुक और व्हाट्सएप थे, और हमारे पास आजादी और निजता थी।उन्होंनें कहा ‘ये मुफ्त है।’ हमने आखें बंद कर लीं, और जब खोलीं तो हमारे पास फेसबुक और व्हाट्सएप थे, और उनके पास हमारी आजादी और निजी जानकारियां।जब भी कोई चीज मुफ्त होती है, तो उसकी कीमत हमें हमारी आजादी दे कर चुकानी पड़ती है।
“ज्ञान से शब्द समझ आते हैं, और अनुभव से अर्थ”

#अनूप