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सोना-चांदी महंगा होने से सराफा बाजार में मंदी, ग्राहक गायब होने से कारोबारियों की बढ़ी चिंता

-सोना-चांदी महंगा होने से सराफा बाजार में मंदी, ग्राहक गायब होने से कारोबारियों की बढ़ी चिंता

मुजफ्फरपुर। सोना-चांदी पर कस्टम ड्यूटी और आयात शुल्क बढ़ाए जाने के बाद जिले के सराफा बाजार में मायूसी छा गई है। केंद्र सरकार के फैसले के बाद अचानक बढ़ी कीमतों ने कारोबारियों और ग्राहकों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। शादी-विवाह और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ी खरीदारी अब मध्यम वर्गीय परिवारों की पहुंच से दूर होती नजर आ रही है।

सराफा बाजार में हालात ऐसे हो गए हैं कि दुकानदार दिनभर ग्राहकों का इंतजार करते रहते हैं, जबकि बढ़ती कीमतों के कारण खरीददार बाजार का रुख करने से बच रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि बाजार में लगभग लॉकडाउन जैसी स्थिति बन गई है।

अखिल भारतीय सराफा संघ के महामंत्री मंजीत कुमार ने बताया कि पहले जिले में हर महीने एक से दो क्विंटल तक सोने-चांदी के आभूषणों की बिक्री हो जाती थी, लेकिन अब कारोबार घटकर मात्र 10 प्रतिशत तक सिमट गया है। उन्होंने कहा कि पहले जहां बाजार में लगातार ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी, वहीं अब पूरा दिन दुकान खुली रहने के बाद भी खरीददार नहीं पहुंच रहे हैं।

उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो दुकानदारों के लिए कर्मचारियों का वेतन, बिजली बिल और अन्य खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाएगा। छोटे कारोबारियों से लेकर बड़े ब्रांडेड शोरूम तक सभी ‘वेट एंड वाच’ की स्थिति में हैं।

बुधवार को सराफा बाजार में सोना-चांदी के दामों में भारी उछाल दर्ज किया गया। जानकारी के अनुसार, ब्रांडेड 22 कैरेट सोना लगभग 1 लाख 53 हजार 90 रुपये प्रति दस ग्राम तक पहुंच गया, जबकि स्थानीय बाजार में यही सोना करीब 1 लाख 48 हजार 800 रुपये प्रति दस ग्राम बिक रहा था। कीमतों में इस भारी अंतर और तेजी के बावजूद बाजार में खरीदारी को लेकर कोई उत्साह नहीं दिखा।

सोनारपट्टी में दोपहर के समय कई दुकानों में सन्नाटा पसरा रहा। संघ के प्रवक्ता राजीव रंजन और कारोबारी विवेक कुमार ने बताया कि पहले दिनभर में कम से कम एक-दो ग्राहक खरीदारी के लिए आ ही जाते थे, लेकिन अब दोपहर तक एक भी ग्राहक दुकान पर नहीं पहुंच रहा।

कारोबारियों का कहना है कि व्यापार भले ठप हो जाए, लेकिन दुकान का किराया, बिजली बिल और कर्मचारियों का खर्च लगातार जारी है। उनका मानना है कि यदि सोना-चांदी पर लगातार शुल्क और टैक्स बढ़ते रहे तो आने वाले दिनों में सराफा बाजार और गहरे संकट में फंस सकता है। वहीं मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए शादी-विवाह जैसे सामाजिक आयोजनों में सोना खरीदना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।