-सड़क किनारे मिलीं कफ सिरप की 200 से अधिक बोतलें, एक्सपायरी डेट भी बाकी
मुजफ्फरपुर। शहर के बटलर कॉलोनी के पास सड़क किनारे कफ सिरप की 200 से अधिक बोतलें लावारिस हालत में मिलने से इलाके में हलचल मच गई। हैरानी की बात यह है कि बोतलों पर दर्ज जानकारी के अनुसार, दवाओं की एक्सपायरी डेट अभी बाकी है। बताया जा रहा है कि इनकी एक्सपायरी तारीख करीब एक साल बाद की है। इतनी बड़ी संख्या में दवाओं के लावारिस हालत में मिलने से उनकी सप्लाई और वितरण व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
घटना काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। मामले की जानकारी सामने आने के बाद औषधि विभाग ने दवाओं की पहचान और उनके स्रोत का पता लगाने की पहल की है। विभाग बोतलों पर दर्ज बैच नंबर के आधार पर निर्माता कंपनी की पहचान करने और सप्लाई चेन की जानकारी जुटाने की कोशिश करेगा।
ड्रग इंस्पेक्टर उदय वल्लभ ने बताया कि कफ सिरप की बोतलों पर दर्ज बैच नंबर की जांच की जाएगी। इसके माध्यम से निर्माता कंपनी का पता लगाने के साथ यह जानकारी भी जुटाई जा सकती है कि दवाएं किस डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए बाजार में पहुंचीं और किन मेडिकल स्टोर या एजेंसियों को उनकी आपूर्ति की गई थी। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि बोतलों को सड़क किनारे किसने और किन परिस्थितियों में फेंका।

ड्रग इंस्पेक्टर के अनुसार, मामले में विभाग को अब तक कोई आधिकारिक लिखित या मौखिक शिकायत नहीं मिली थी। हालांकि, घटना की जानकारी सामने आने के बाद विभाग ने इसे संज्ञान में लिया है। दवाओं की पहचान और उनके वितरण से संबंधित तथ्यों की पड़ताल की जाएगी।
अवैध कारोबार की आशंका, जांच पर टिकी निगाहें:
सड़क किनारे एक साथ 200 से अधिक कफ सिरप की बोतलें मिलने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जब दवाओं की एक्सपायरी डेट समाप्त नहीं हुई थी, तो उन्हें लावारिस हालत में छोड़ने की वजह क्या थी? क्या ये बोतलें किसी मेडिकल एजेंसी या डिस्ट्रीब्यूटर से जुड़ी हैं अथवा इनके पीछे कोई अन्य कारण है? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही मिल सकेगा।
घटना के बाद कफ सिरप के संभावित दुरुपयोग और अवैध कारोबार को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, फिलहाल ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे बरामद बोतलों का संबंध नशे के अवैध कारोबार से साबित हो सके।
अब औषधि विभाग की जांच से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि दवाएं कहां से आई थीं, उनकी आपूर्ति किस माध्यम से हुई थी और उन्हें सड़क किनारे क्यों छोड़ा गया। बोतलों पर दर्ज बैच नंबर इस मामले की जांच में अहम कड़ी साबित हो सकता है।











