-शिवहर को मिली बड़ी सौगात: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया बेलवा-मीनापुर लिंक चैनल का लोकार्पण
-बाढ़ और सिंचाई की समस्या से मिलेगी राहत
शिवहर। उत्तर बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए रविवार का दिन ऐतिहासिक रहा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिवहर जिले के पिपराही प्रखंड स्थित बेलवा घाट पर करीब 130 करोड़ 88 लाख 57 हजार रुपये की लागत से निर्मित बेलवा-मीनापुर लिंक चैनल परियोजना का लोकार्पण किया। इसके साथ ही विभिन्न विभागों की 40 विकास योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास भी किया गया।
मुख्यमंत्री दो हेलीकॉप्टरों से बेलवा घाट पहुंचे, जहां उन्होंने फीता काटकर परियोजना का उद्घाटन किया और विभागीय अधिकारियों से इसकी तकनीकी जानकारी ली। उद्घाटन के बाद लिंक चैनल को औपचारिक रूप से चालू कर दिया गया।
इस अवसर पर समाज कल्याण मंत्री एवं शिवहर विधायक डॉ. श्वेता गुप्ता, सांसद लवली आनंद, पूर्व सांसद रमा देवी, सीतामढ़ी सांसद देवेश चंद्र ठाकुर, ऋतु जायसवाल, पूर्व विधायक ठाकुर रत्नाकर राणा सहित कई जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी और जिला प्रशासन के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि शिवहर वर्षों से बागमती नदी की बाढ़ का दंश झेलता रहा है। हर साल आने वाली बाढ़ से किसानों की फसलें बर्बाद होती थीं और आम जनजीवन प्रभावित होता था। उन्होंने कहा कि बेलवा-मीनापुर लिंक चैनल केवल एक इंजीनियरिंग परियोजना नहीं, बल्कि किसानों की राहत, समृद्धि और खुशहाली का नया अध्याय है।

उन्होंने विश्वास जताया कि इस परियोजना के शुरू होने से बाढ़ के पानी का बेहतर प्रबंधन होगा और किसानों को पूरे वर्ष सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा। इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी, खेती की लागत कम होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सरकार विकास कार्यों को मिशन मोड में आगे बढ़ा रही है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को जवाबदेही के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास परियोजनाओं का समय पर क्रियान्वयन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बेलवा-मीनापुर लिंक चैनल परियोजना को शिवहर और आसपास के क्षेत्रों के लिए ‘गेम चेंजर’ माना जा रहा है। वर्षों से बाढ़ और सिंचाई की दोहरी समस्या से जूझ रहे किसानों को उम्मीद है कि यह परियोजना खेती को नई दिशा देगी और क्षेत्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।











