-शहवाजपुर जमीन फर्जीवाड़ा मामले में राजस्व अधिकारी करुण करण निलंबित
-सेवानिवृत्त आईएएस विजय कुमार से जुड़ी जमीन के दाखिल-खारिज में गड़बड़ी का आरोप
-तत्कालीन सीओ महेंद्र कुमार शुक्ला पर भी हुई थी कार्रवाई
मुजफ्फरपुर। जिले के मुशहरी अंचल के शहवाजपुर में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी विजय कुमार से जुड़ी जमीन के कथित फर्जीवाड़े का मामला एक बार फिर चर्चा में है। जमीन के नामांतरण और दाखिल-खारिज में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों तथा कूटरचित कागजातों के इस्तेमाल के मामले में राजस्व विभाग ने तत्कालीन राजस्व अधिकारी करुण करण को निलंबित कर दिया है। इससे पहले तत्कालीन अंचलाधिकारी महेंद्र कुमार शुक्ला के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी। दोनों अधिकारियों की भूमिका को लेकर जांच के दौरान गंभीर आरोप सामने आए थे।
करीब 70 डिसमिल जमीन के दाखिल-खारिज का मामला:
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अहियापुर थाना क्षेत्र में करीब 70 डिसमिल जमीन के कथित फर्जी केवाले के आधार पर अवैध रूप से दाखिल-खारिज किए जाने का मामला सामने आया था। इस मामले में मुशहरी, अहियापुर और सदर थानों में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बाद तत्कालीन सीओ महेंद्र कुमार शुक्ला और राजस्व अधिकारी करुण करण को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा था। दोनों अधिकारियों पर आपराधिक षड्यंत्र में संलिप्तता के आरोप लगे थे।

सीओ के बाद आरओ पर विभागीय कार्रवाई:
मामले में तत्कालीन अंचलाधिकारी महेंद्र कुमार शुक्ला को जेल भेजे जाने से एक दिन पहले निलंबित कर दिया गया था। अब राजस्व विभाग ने तत्कालीन राजस्व अधिकारी करुण करण को भी निलंबित कर दिया है। हालांकि, विशेष अदालत से जमानत मिलने के बाद दोनों अधिकारियों को रिहा किए जाने की जानकारी सामने आई है, लेकिन विभागीय स्तर पर कार्रवाई जारी है।
जांच के दायरे में और लोगों के आने की आशंका:
जमानत पर रिहाई के बावजूद मामले से जुड़े आरोपों और जांच की प्रक्रिया को लेकर स्थिति बनी हुई है। इस प्रकरण में अन्य मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने की भी जानकारी सामने आई है। ऐसे में जांच का दायरा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की ओर से भूमि विवाद, फर्जी दस्तावेजों और अवैध दाखिल-खारिज से जुड़े मामलों में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है।
फिलहाल, इस मामले में जांच और विभागीय कार्रवाई के अगले चरण पर नजर बनी हुई है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।












