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व्यंय : ‘कुर्सी नेता की…नीचे की जमीन चमचे की!’

#चमचा:

कुर्सी नेता की
नीचे की जमीन चमचे की
राजनीति नेता की
जात की दलाली चमचे का
जूता नेता का
सर चमचा का
चापलूसी चमचे की
चालाकी नेता की
पान खाया मुंह चमचे का
चमकता चेहरा नेता का
सियासत नेता की
मौका परस्ती चमचे का
घोटाला परिवार वाद नेता की
बचाव की मुद्रा चमचे की
गठबंधन पलटी मार नेता की
गिरगिट सा रंग चमचे का
पूरी विरासत नेता की
जूठन चमचे का
अपने अंदर के इस चमचे को मारो
सियासत में अपना चेहरा निखारो

#अनूप
(नोट : इस कविता का भाव अगर किसी राजनेता के प्रिय चमचे से मेल खाए तो इसे महज संजोग समझा जाए, किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से इसका कोई लेना देना नहीं है पात्र और घटनाएं काल्पनिक है)