-मैथिली परिषद की बैठक में मकर संक्रांति की तिथि पर हुआ निर्णय, 14 जनवरी को ही मनाने पर सहमति
मुजफ्फरपुर।
मैथिली परिषद द्वारा सोमवार को मुजफ्फरपुर के धर्म समाज संस्कृत महाविद्यालय परिसर स्थित धर्मनाथ मंदिर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य मकर संक्रांति पर्व को लेकर 14 एवं 15 जनवरी की तिथि में उत्पन्न मतभेदों पर विचार-विमर्श करना था। साथ ही षट्तिला एकादशी के धार्मिक महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में उपस्थित आचार्यों एवं विद्वानों ने पंचांग, शास्त्रों और ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर मकर संक्रांति की तिथि पर अपने-अपने विचार रखे। आचार्यों ने बताया कि 14 जनवरी की रात्रि 9 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। शास्त्रों के अनुसार संक्रमण काल 40 दंड का होता है, जिसमें 20 दंड पूर्व एवं 20 दंड बाद को पुण्यकाल माना जाता है। इसी सिद्धांत के आधार पर यह निर्णय लिया गया कि सूर्य के मकर राशि में प्रवेश से पूर्व आठ घंटे का पुण्यकाल मान्य होगा। इसलिए मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को ही मनाना शास्त्रसम्मत होगा।

बैठक को आचार्य राघवेंद्र मिश्रा, सुनील कुमार झा, डॉ. आचार्य अमित कुमार झा, धर्मेंद्र ठाकुर, दिलीप कुमार मिश्रा, लोकेश नाथ मिश्र, महंत नवल गिरी, विपिन मिश्रा, पुण्यकांत झा, अभय मिश्रा, गौरी शंकर मिश्र, मुकुंदानंद शास्त्री, सर्वेश झा, देवनाथ झा, सुधीर कुमार मिश्रा (पप्पू), शशि रंजन झा, शंकर झा, मानस कुमार, आचार्य अमरनाथ शास्त्री, पंडित शिवम झा, पंडित मनीष झा, पंडित चंद्र भूषण मिश्रा एवं पंडित अनिल झा सहित अन्य विद्वानों ने संबोधित किया।
बैठक के अंत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मकर संक्रांति पर्व 14 जनवरी को ही मनाया जाएगा तथा इस संबंध में समाज को सही जानकारी देने का आह्वान किया गया।












