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मकर संक्रांति : सूर्य, संस्कृति और समरसता का महापर्व

-मकर संक्रांति : सूर्य, संस्कृति और समरसता का महापर्व

आलेख: दीपक कुमार तिवारी।

भारतीय संस्कृति में मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, खगोल विज्ञान और परंपराओं के गहरे समन्वय का प्रतीक है। यह त्योहार हर वर्ष जनवरी माह में तब मनाया जाता है, जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी खगोलीय परिवर्तन से ऋतु परिवर्तन की शुरुआत होती है और दिन बड़े तथा रातें छोटी होने लगती हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

मकर संक्रांति का उल्लेख वेदों, पुराणों और महाभारत काल से मिलता है। माना जाता है कि इसी दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिसे शुभ काल माना गया है। भीष्म पितामह ने भी महाभारत युद्ध के बाद उत्तरायण काल की प्रतीक्षा कर इसी दिन देह त्याग किया था। इस कारण यह पर्व मोक्ष और आत्मिक शुद्धि से भी जुड़ा हुआ है।

खगोलीय और वैज्ञानिक महत्व:

मकर संक्रांति का आधार पूर्णतः खगोल विज्ञान पर टिका है। यह एकमात्र भारतीय पर्व है, जो सौर गणना पर आधारित है, जबकि अधिकांश त्योहार चंद्र कैलेंडर के अनुसार मनाए जाते हैं। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही शीत ऋतु धीरे-धीरे विदा लेने लगती है और बसंत की ओर कदम बढ़ते हैं। किसानों के लिए यह समय फसल कटाई का होता है, इसलिए यह पर्व अन्न, श्रम और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक बन गया।

 

पारंपरिक मान्यताएं और रीति-रिवाज:

देश के अलग-अलग हिस्सों में मकर संक्रांति विभिन्न नामों से मनाई जाती है—पोंगल (तमिलनाडु), उत्तरायण (गुजरात), खिचड़ी (उत्तर प्रदेश-बिहार), माघ बिहू (असम) और लोहड़ी (पंजाब)। गंगा, यमुना सहित पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य, तिल-गुड़ का सेवन और पतंगबाजी इस पर्व की प्रमुख परंपराएं हैं। तिल और गुड़ को आपसी सौहार्द और मधुर संबंधों का प्रतीक माना जाता है।

सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश:

मकर संक्रांति हमें एकता, समानता और प्रकृति के साथ सामंजस्य का संदेश देती है। यह पर्व जाति, वर्ग और क्षेत्र की सीमाओं से ऊपर उठकर लोगों को जोड़ता है। सूर्य के समान जीवन में प्रकाश, सकारात्मकता और ऊर्जा लाने की प्रेरणा देता है।

मकर संक्रांति भारतीय सभ्यता की उस गहराई को दर्शाती है, जहां विज्ञान और आस्था एक-दूसरे के पूरक हैं। यह पर्व न केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत देता है, बल्कि जीवन में नई शुरुआत, आशा और समृद्धि का संदेश भी देता है। इसी कारण मकर संक्रांति सदियों से भारतीय जनजीवन में उल्लास और आस्था के साथ मनाई जाती रही है।